
प्रस्तावना
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में एक भावनात्मक वीडियो संदेश में देशवासियों को संबोधित करते हुए हमास द्वारा बंधक बनाए गए इज़रायली नागरिकों की स्थिति पर गहरा दुख और आक्रोश जताया है। उन्होंने इस मुद्दे पर अपने निजी अनुभव, भावनाएं और सरकार की आगामी रणनीति साझा की।
बंधकों की व्यथा पर नेतन्याहू की प्रतिक्रिया
नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने एक वीडियो देखा जिसमें इज़राइली बंधकों की भयावह स्थिति दिखाई गई थी — जिनमें रूम और अवीचर नाम के नागरिक भी शामिल थे। उन्होंने यह स्वीकार किया कि यह दृश्य हृदयविदारक था और उन्होंने इन पीड़ितों को व्यक्तिगत रूप से और पूरे देश की ओर से अपना समर्थन और प्यार भेजा।
हमास की क्रूरता पर तीखा हमला
अपने संबोधन में नेतन्याहू ने हमास की बर्बरता की तुलना नाज़ियों से की। उन्होंने बताया कि बंधकों को बेसुध हालत में दिखाया गया, उनके पास बुनियादी ज़रूरतों की भी भारी कमी है — न भोजन, न दवा, न स्वच्छता। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हमास इन्हें इंसानों की तरह नहीं, बल्कि “मांस के टुकड़ों” की तरह देखता है।
“हम झुकेंगे नहीं” – नेतन्याहू का संकल्प
प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि हमास इन वीडियो और प्रचार के माध्यम से इज़राइल को तोड़ना चाहता है, लेकिन वह सफल नहीं होगा। उन्होंने यह दोहराया कि इज़राइल झुकेगा नहीं, बल्कि और मज़बूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने सेना और सुरक्षा बलों से मिलकर सभी बंधकों को छुड़ाने और हमास को नेस्तनाबूद करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रचार और झूठ की साजिश
नेतन्याहू ने यह भी कहा कि हमास केवल बंधकों की शारीरिक स्थिति का शोषण नहीं कर रहा, बल्कि वीडियो और झूठे प्रचार के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। यह केवल एक युद्ध नहीं, बल्कि सत्य और असत्य के बीच की लड़ाई है।
निष्कर्ष
नेतन्याहू का यह संबोधन न केवल हमास की अमानवीयता को उजागर करता है, बल्कि इज़रायली नागरिकों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और अडिग संकल्प को भी दर्शाता है। यह संदेश इज़राइली समाज को एकजुट रखने और बंधकों को मुक्त कराने की दिशा में एक स्पष्ट राजनीतिक और नैतिक स्थिति है।