
हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाने वाला विश्व स्तनपान सप्ताह केवल एक स्वास्थ्य अभियान नहीं, बल्कि मातृत्व, पोषण और संरक्षण के साझा मूल्यों को सम्मानित करने का एक वैश्विक प्रयास है।
👩🍼 स्तनपान: एक प्रकृतिप्रदत्त सुरक्षा कवच
स्तनपान सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि शिशु के संपूर्ण विकास की नींव है:
- यह शिशु की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्राकृतिक रूप से मजबूत बनाता है।
- माँ और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव को प्रगाढ़ करता है।
- बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🧁 छह महीने के बाद भी ज़रूरी है माँ का दूध
हालाँकि छह माह बाद शिशु को ठोस आहार की ओर बढ़ाया जाता है, लेकिन स्तनपान की अहमियत कम नहीं होती:
- यह संक्रमणों से बचाने वाली ढाल का काम करता है।
- बढ़ते बच्चे को ऊर्जा और पोषण का अतिरिक्त स्रोत प्रदान करता है।
- आपातकालीन स्थितियों में भी यह सबसे भरोसेमंद भोजन बना रहता है।
🏥 समर्थन प्रणाली: जानकारी और सहारा
भारत में आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स (आरोग्य मंदिरों) पर माताओं को स्तनपान से जुड़ी सलाह, तकनीकी मार्गदर्शन और पोषण संबंधी सहायता मिलती है। प्रशिक्षित नर्सें और स्वास्थ्य कर्मी जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
💬 हर माँ के लिए एक प्रेरणास्पद संदेश
हर बार जब आप अपने शिशु को स्तनपान कराती हैं, तब आप उसे सिर्फ पोषण नहीं, बल्कि:
- सुरक्षा की भावना,
- आत्मीयता की अनुभूति,
- और जीवन की पहली सीख दे रही होती हैं।
🌱 माँ का दूध: पहला टीका, पहला आशीर्वाद
स्तनपान न केवल एक जैविक आवश्यकता है, बल्कि यह सामाजिक चेतना और स्वास्थ्य सशक्तिकरण का माध्यम भी है। माताओं को समर्थन देना, स्तनपान को सामान्य बनाना, और इसके महत्व को जन-जन तक पहुँचाना आज की आवश्यकता है।