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🌐 संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में तुर्कमेनिस्तान की मेज़बानी: एक वैश्विक साझेदारी की मिसाल


04 अगस्त 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने एक ऐतिहासिक ट्वीट के माध्यम से तुर्कमेनिस्तान को तीसरे “संयुक्त राष्ट्र स्थलवेष्टित विकासशील देशों (LLDCs)” सम्मेलन की सफल मेज़बानी के लिए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर उन्होंने तुर्कमेनिस्तान की जनता, राष्ट्रपति सेरदर बर्डीमुहामेदोव और राष्ट्रीय नेता व पीपुल्स काउंसिल के अध्यक्ष गुरबांगुली बर्डीमुहामेदोव की मेहमाननवाज़ी और नेतृत्व की सराहना की।

यह सम्मेलन उन देशों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो समुद्र से घिरे नहीं हैं और जिनकी वैश्विक व्यापार और परिवहन तक पहुंच सीमित है। ऐसे देशों के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और क्षेत्रीय एकता आवश्यक माने जाते हैं।

🟢 तुर्कमेनिस्तान की भूमिका:

तुर्कमेनिस्तान ने इस सम्मेलन की मेज़बानी करके यह दिखा दिया कि वह वैश्विक विकास एजेंडा में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। राजधानी अश्गाबात में आयोजित सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र का झंडा और तुर्कमेन ध्वज एक साथ लहराते नज़र आए — यह दृश्य वैश्विक सहयोग और साझा लक्ष्यों का प्रतीक बन गया।

🫱🏻‍🫲🏼 गुटेरेस का संदेश:

महासचिव गुटेरेस ने अपने संदेश में कहा कि यह सम्मेलन न केवल तुर्कमेनिस्तान की कूटनीतिक सूझबूझ का परिचायक है, बल्कि यह उस देश की सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

📷 उनके ट्वीट में दो तस्वीरें साझा की गईं — एक तस्वीर में वे राष्ट्रपति सेरदर बर्डीमुहामेदोव के साथ गर्मजोशी से हाथ मिला रहे हैं और दूसरी में सम्मेलन स्थल का विहंगम दृश्य दिखाया गया है।

🌱 सतत विकास की दिशा में कदम:

स्थलवेष्टित विकासशील देशों को जल मार्गों की अनुपलब्धता के कारण आर्थिक, व्यापारिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस सम्मेलन का उद्देश्य इन देशों के लिए नीति निर्माण, बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा और आपसी सहयोग के माध्यम से समाधान निकालना था।


🔚 निष्कर्ष:

तुर्कमेनिस्तान द्वारा तीसरे संयुक्त राष्ट्र LLDC सम्मेलन की सफल मेज़बानी न केवल उसकी अंतरराष्ट्रीय साख को मजबूत करती है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि विश्व के हर क्षेत्र में, चाहे वह कितना भी सीमित क्यों न हो, विकास और सहयोग की संभावनाएँ हमेशा मौजूद रहती हैं।

यह सम्मेलन भविष्य के लिए एक प्रेरक उदाहरण है कि साझेदारी, समर्पण और संवाद से हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।


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