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🛩️ VVIP हेलीकॉप्टर सौदा घोटाला: क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को दोष कबूल किए बिना नहीं मिलेगी रिहाई — CBI का दो-टूक जवाब


नई दिल्ली, 5 अगस्त 2025: वीवीआईपी हेलीकॉप्टर खरीद घोटाले के बहुचर्चित मामले में मुख्य आरोपी क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की रिहाई को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को दिल्ली की एक विशेष अदालत में अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक आरोपी दोष कबूल नहीं करता, उसे रिहाई का लाभ नहीं दिया जा सकता

ब्रिटिश नागरिक मिशेल ने अदालत में याचिका दायर कर यह तर्क दिया था कि वह भारत में प्रत्यर्पण के बाद से लगभग सात वर्षों से हिरासत में है, जो कि कई मामलों में अधिकतम सजा की अवधि के बराबर है, इसलिए उसे रिहा किया जाए। लेकिन CBI ने इसे कानूनी रूप से अस्वीकार्य बताते हुए विरोध दर्ज कराया।

🧾 क्या है पूरा मामला?

वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदा, जो 2010 में अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी से 12 लग्जरी हेलीकॉप्टरों की खरीद को लेकर हुआ था, उसमें कथित तौर पर बड़े पैमाने पर रिश्वत और भ्रष्टाचार की बात सामने आई। इस डील में $60 मिलियन (करीब ₹360 करोड़) की कथित घूस की बात उजागर हुई थी।

क्रिश्चियन मिशेल जेम्स, एक ब्रिटिश बिचौलिया, को 4 दिसंबर 2018 को यूएई से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। उसी दिन उसे CBI ने गिरफ्तार किया, और बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अपनी हिरासत में लिया।

⚖️ अदालत में क्या हुआ?

विशेष CBI जज संजय जिंदल के समक्ष हुई सुनवाई में, सरकारी वकील डी. पी. सिंह और सह-प्रवक्ता मनु मिश्रा ने दलील दी कि भारतीय कानून के तहत आरोपी को सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ा जा सकता कि उसने हिरासत में लंबा समय बिताया है।

CBI ने कहा कि मिशेल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (जालसाजी, जिसकी सजा उम्रकैद तक हो सकती है) के तहत मामले लंबित हैं, और अभी आरोप तय होना बाकी है। इसलिए, रिहाई की मांग को कानूनन उचित नहीं ठहराया जा सकता

🚫 तकनीकी कारण से रिहाई नहीं

दिलचस्प तथ्य यह है कि मिशेल को CBI और ED दोनों मामलों में जमानत मिल चुकी है, लेकिन उसने न तो जमानत बांड भरा, और न ही अपना पासपोर्ट अदालत में जमा कराया, जिसके चलते वह अब भी न्यायिक हिरासत में है।

🗣️ CBI का साफ संदेश

CBI ने दो-टूक शब्दों में कहा कि “दोषी कबूल किए बिना, सिर्फ हिरासत की अवधि पूरी कर लेने से किसी भी आरोपी को कानूनी रूप से मुक्त नहीं किया जा सकता।” यह रुख एजेंसी की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में ज़ीरो टॉलरेंस की बात कही जाती है।


🔍 निष्कर्ष

VVIP हेलीकॉप्टर सौदा मामला केवल एक रक्षा सौदे में भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि भारत की न्यायिक और कूटनीतिक क्षमता का भी परीक्षण बन चुका है। क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की रिहाई को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया में CBI का यह सख्त रुख दर्शाता है कि देश की न्याय प्रणाली अब बड़े अंतरराष्ट्रीय आरोपियों को भी कानूनी दायरे में लाने से पीछे नहीं हटती


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