
उधमपुर, जम्मू-कश्मीर | 5 अगस्त 2025 — रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर उधमपुर के बच्चों ने एक अनोखी पहल की, जिसमें न सिर्फ उनके रचनात्मक मन की झलक दिखी, बल्कि राष्ट्र के प्रति उनका अटूट प्रेम भी सामने आया। “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद यह पहला रक्षाबंधन था, और इसे खास बनाते हुए स्थानीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने सैनिकों के लिए अपने हाथों से सैकड़ों राखियाँ और भावनात्मक संदेश तैयार किए।
🧵 राखियाँ जो बाजार से नहीं, दिल से बनीं
उधमपुर के कई विद्यालयों में पिछले हफ्ते से ही एक अलग ही उत्साह का माहौल था। बच्चों ने रंग-बिरंगे धागों, रिबनों और मोतियों से सजी ऐसी राखियाँ बनाई, जिनमें उनका स्नेह, श्रद्धा और गर्व पिरोया गया था। कोई सैनिकों के लिए सुरक्षा की दुआ लिख रहा था, तो कोई देशभक्ति गीत गुनगुना रहा था।
कक्षा 7 की छात्रा प्रेरणा ठाकुर कहती हैं — “हमारे सैनिक जब देश की रक्षा के लिए अपनों से दूर होते हैं, तो हम उनका परिवार बनकर उन्हें यह अहसास दिलाना चाहते हैं कि वो अकेले नहीं हैं।”
📬 डाक नहीं, भावना का पुल
बच्चों द्वारा तैयार की गई राखियों को स्थानीय प्रशासन और सेना के सहयोग से संबंधित सैन्य कैंपों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही बच्चों द्वारा लिखे गए धन्यवाद पत्र, चित्र, और छोटे वीडियो संदेश भी सैनिकों को भेजे जा रहे हैं।
एक शिक्षक ने बताया — “यह केवल एक राखी नहीं, बल्कि एक पुल है — जो बच्चों के दिलों से सीधे देश की सीमाओं तक जाता है।”
🪖 ऑपरेशन सिंदूर: साहस और बलिदान की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि “ऑपरेशन सिंदूर” एक अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य अभियान था, जो जम्मू-कश्मीर के ऊपरी इलाकों में आतंकवादी गतिविधियों के सफाए हेतु चलाया गया। इस अभियान में कई वीर सैनिकों ने शहादत दी और कई ने साहसिक कार्यों के लिए सम्मान प्राप्त किए। इस पृष्ठभूमि में यह रक्षाबंधन, केवल एक त्यौहार नहीं बल्कि सम्मान की अभिव्यक्ति बन गया।
🏫 नई पीढ़ी में राष्ट्रभाव की चेतना
इस संपूर्ण अभियान में शिक्षकों की भूमिका भी सराहनीय रही, जिन्होंने बच्चों को सेना के बलिदान और देशप्रेम का महत्व समझाया। कई विद्यालयों में सैनिकों के लिए प्रार्थना सभाएँ, पोस्टर प्रतियोगिताएँ और देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति भी आयोजित की गई।
प्रधानाचार्या सीमा चौहान कहती हैं — “हम चाहते हैं कि बच्चों में बचपन से ही देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो। यह सिर्फ शिक्षण नहीं, संस्कार भी है।”
✨ निष्कर्ष: राखी की डोर, देश की डोर
इस अनोखी पहल ने रक्षाबंधन को एक नई परिभाषा दी है। यह न केवल बहन-भाई के रिश्ते की बात है, बल्कि देश और सैनिक के उस अटूट बंधन की भी, जो भावना, कर्तव्य और बलिदान से जुड़ा होता है।
उधमपुर के इन नन्हे हाथों ने जो संदेश भेजा है, वह स्पष्ट है — “हम आपके साथ हैं, सैनिक भाइयों! हमारा देश आप पर गर्व करता है।”