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🏏 एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में ऐतिहासिक रन उत्सव: बल्लेबाज़ी का बोलबाला, रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ टेस्ट सीरीज़ का नाम


लंदन, 5 अगस्त 2025 — भारत और इंग्लैंड के बीच खेली गई एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी टेस्ट सीरीज़ ने न केवल क्रिकेट प्रेमियों को रोमांचित किया, बल्कि रिकॉर्ड बुक में भी अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया। पांच टेस्ट मैचों की यह श्रंखला 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुई, लेकिन इसमें जो बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन देखने को मिला, वह अभूतपूर्व और ऐतिहासिक था।

पूरी सीरीज़ के दौरान दोनों टीमों ने बेहद उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेला। इस दौरान कुल 7,187 रन बने — जो टेस्ट इतिहास में दूसरी सबसे अधिक रन संख्‍या है। दोनों टीमों ने मिलकर 14 बार 300 या उससे अधिक का स्कोर खड़ा किया, जो अब तक के टेस्ट इतिहास में किसी सीरीज़ में सबसे अधिक 300+ स्कोर की बराबरी करता है।

🌟 बल्लेबाज़ों का वर्चस्व

इस रन महोत्सव में बल्लेबाज़ों का दबदबा साफ देखने को मिला। दोनों टीमों के 9 खिलाड़ियों ने 400 या उससे अधिक रन बनाए, जो शीर्ष और मध्यक्रम के बल्लेबाज़ों की निरंतरता और धैर्य को दर्शाता है।

सीरीज़ में कुल 50 बार बल्लेबाज़ों ने पचास या उससे अधिक रन बनाए — यह एक और ऐसा कीर्तिमान है जो टेस्ट इतिहास में सबसे अधिक की बराबरी करता है। साथ ही, 21 शतक इस सीरीज़ में लगे, जो किसी भी टेस्ट सीरीज़ में सर्वाधिक शतकों के रिकॉर्ड की बराबरी करता है।

🤝 साझेदारियों ने गढ़ी कहानियाँ

बड़ी साझेदारियाँ इस सीरीज़ की नींव रहीं। कुल 19 शतकीय साझेदारियाँ बनीं — जो टेस्ट इतिहास में संयुक्त रूप से सबसे अधिक हैं।

विशेष रूप से इंग्लैंड के जो रूट और हैरी ब्रूक की 195 रनों की साझेदारी चौथी पारी में बनी, जो अब टेस्ट इतिहास में किसी हारने वाली टीम की दूसरी सबसे बड़ी चौथी पारी की साझेदारी बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड भारत के केएल राहुल और ऋषभ पंत के नाम था, जिन्होंने 2018 में ओवल टेस्ट में 204 रनों की साझेदारी की थी।

हालांकि रूट-ब्रूक की जोड़ी इंग्लैंड को जीत नहीं दिला सकी। 332/4 की मजबूत स्थिति से इंग्लैंड का अचानक पतन हुआ और टीम मुकाबला हार गई।

🏅 जो रूट का शतक और ऐतिहासिक उपलब्धि

जो रूट ने अंतिम पारी में अपने करियर का 39वां टेस्ट शतक जड़ा। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने कुमार संगकारा (38 शतक) को पीछे छोड़ दिया और अब शतकों की सूची में केवल सचिन तेंदुलकर (51), जैक कैलिस (45) और रिकी पोंटिंग (41) ही उनसे आगे हैं। यह शतक रूट की निरंतरता और महानता का प्रतीक बन गया है।


📌 निष्कर्ष

एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी की यह श्रृंखला बल्लेबाज़ी कौशल, दृढ़ता और प्रतिस्पर्धा का एक अद्भुत उदाहरण रही। यह सीरीज़ न केवल आंकड़ों के लिहाज़ से ऐतिहासिक रही, बल्कि क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक उत्सव जैसी साबित हुई। आने वाले वर्षों में इस सीरीज़ को टेस्ट क्रिकेट की स्वर्णिम मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।


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