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📰 PDA पाठशाला पर अखिलेश यादव का पलटवार: “CM खुद आकर देखें, पुलिस इसे नहीं रोक सकती”


लखनऊ (उत्तर प्रदेश), 5 अगस्त – समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में चल रही “PDA पाठशाला” को लेकर उठे विवाद के बीच सख्त बयान देते हुए कहा कि यह शैक्षणिक पहल किसी भी कीमत पर रोकी नहीं जाएगी। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती देते हुए कहा कि वे खुद आएं और स्थिति का जायज़ा लें, क्योंकि पुलिस इस पहल को रोक पाने में सक्षम नहीं है।

🔴 “भर्ती तक चलेगी पाठशाला” – अखिलेश यादव

मीडिया से संवाद के दौरान अखिलेश यादव ने साफ किया कि सपा कार्यकर्ताओं द्वारा शुरू की गई यह पहल तब तक जारी रहेगी जब तक प्रदेश सरकार नई शिक्षक भर्तियों को अमल में नहीं लाती। उन्होंने कहा,

“सरकार ने खुद यह मान लिया है कि कई विद्यालय बंद कर दिए गए हैं या उन्हें आपस में मिला दिया गया है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। हमारी पाठशाला तब तक चलेगी, जब तक सरकार विद्यालयों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर देती।”

🔥 BJP के आरोपों पर सपा का जवाब

PDA पाठशाला को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने आरोप लगाया था कि सपा इस पहल के ज़रिए भाई-भतीजावाद को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा था कि सपा ‘A for अखिलेश’ और ‘D for डिंपल’ सिखा रही है, जो बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

इस टिप्पणी के जवाब में समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रो. राम गोपाल यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा,

“यह एफआईआर और आलोचना उन लोगों की देन है जो न केवल अज्ञानी हैं बल्कि संकीर्ण मानसिकता रखते हैं। शिक्षा की सेवा करना अपराध कैसे हो सकता है?”

📚 “A for अखिलेश, B for बाबा” पर उठे सवाल

इस मुद्दे ने तब और तूल पकड़ लिया जब PDA पाठशाला में बच्चों को ‘A for अखिलेश’ और ‘B for बाबा’ जैसे शब्दों से सिखाने की बात सामने आई। इस पर भी अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है।
उन्होंने सवाल किया:

“अगर बच्चों को हम ‘A for अखिलेश’ और ‘B for बाबा’ सिखा रहे हैं, तो इसमें गलत क्या है? क्या यह शिक्षा को राजनीतिक रंग देने से ज्यादा कुछ है?”

🧠 राजनीतिक उद्देश्य या सामाजिक पहल?

जहां भाजपा इसे समाजवादी पार्टी की राजनीतिक चाल बता रही है, वहीं सपा इसे सरकार की नाकामी के बीच एक सामाजिक और शैक्षिक जिम्मेदारी के रूप में देख रही है। PDA पाठशाला अब केवल एक शिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहस का केंद्र बन चुकी है।


📌 निष्कर्ष:

PDA पाठशाला को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में उबाल है। एक ओर सपा इसे शिक्षा के अधिकार और सरकारी विफलताओं के विरुद्ध एक क्रांतिकारी पहल बता रही है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक हथकंडा करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस संघर्ष का अगला अध्याय क्या मोड़ लेता है।


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