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🇮🇳 भारत की सेमीकंडक्टर क्रांति: तकनीकी आत्मनिर्भरता की नई दिशा


प्रस्तावना

21वीं सदी में जिस तकनीक ने पूरी दुनिया के डिजिटल ढांचे की नींव रखी है, वह है सेमीकंडक्टर तकनीक। मोबाइल से लेकर मिसाइल तक, हर उन्नत उपकरण सेमीकंडक्टर चिप्स के बिना अधूरा है। भारत, जो अब तक इस तकनीक का बड़ा उपभोक्ता रहा है, आज उसे विकसित करने वाले अग्रणी देशों में शामिल होने के लिए तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।


सेमीकंडक्टर क्या हैं?

सेमीकंडक्टर या अर्धचालक वे विशेष पदार्थ होते हैं जिनकी विद्युत चालकता परिस्थिति के अनुसार बदलती है। इनसे इलेक्ट्रॉनिक चिप्स, माइक्रोप्रोसेसर, ट्रांजिस्टर आदि बनाए जाते हैं। ये तकनीक आज हर क्षेत्र—स्वास्थ्य, रक्षा, संचार, अंतरिक्ष—का मूल आधार बन चुकी है।


भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की स्थिति

भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग की शुरुआत अपेक्षाकृत देर से हुई, लेकिन 2020 के बाद वैश्विक आपूर्ति संकट ने भारत को यह सोचने पर मजबूर किया कि तकनीकी आत्मनिर्भरता अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। अब भारत न केवल आयात पर निर्भरता घटा रहा है, बल्कि घरेलू उत्पादन की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।


भारत सरकार की प्रमुख पहलें

1. इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM)

भारत सरकार ने ₹76,000 करोड़ की लागत से यह मिशन शुरू किया है, जिसका उद्देश्य डिज़ाइन, निर्माण और अनुसंधान को बढ़ावा देना है।

2. ‘मेक इन इंडिया’ के तहत निवेश

Micron, Vedanta-Foxconn, और Tata जैसी बड़ी कंपनियाँ गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु आदि में फैब्रिकेशन यूनिट स्थापित कर रही हैं।

3. वैश्विक साझेदारियाँ

भारत ने अमेरिका, जापान, ताइवान और यूरोपीय संघ के साथ तकनीकी साझेदारी की है, जिससे ज्ञान, तकनीक और पूंजी का प्रवाह सुनिश्चित हो रहा है।

4. स्थानीय विनिर्माण हब

डोलेरा (गुजरात), होसुर (तमिलनाडु) और यमुनाएक्सप्रेसवे (उत्तर प्रदेश) को सेमीकंडक्टर उत्पादन के विशेष क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है।


शिक्षा और प्रशिक्षण: भविष्य के लिए नींव

IITs, IIITs और NITs में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, VLSI और नैनोटेक्नोलॉजी पर विशेष कोर्स शुरू किए गए हैं। ‘Chip to Startup’ और ‘Design Linked Incentive’ योजनाओं के माध्यम से युवा इंजीनियरों को प्रशिक्षण देकर टेक्नोलॉजी के प्रति सक्षम बनाया जा रहा है।


भारत की वैश्विक स्थिति

आज भारत को एक उभरते हुए “सेमीकंडक्टर डेस्टिनेशन” के रूप में देखा जा रहा है। मजबूत जनसांख्यिकी, नीतिगत स्थिरता, और डिजिटल बुनियादी ढांचे के कारण वैश्विक कंपनियाँ भारत को निवेश-योग्य स्थल मान रही हैं।


निष्कर्ष

भारत की सेमीकंडक्टर क्रांति केवल आर्थिक समृद्धि की दिशा में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल संप्रभुता और तकनीकी नेतृत्व की ओर एक बड़ा कदम है। यदि योजनाएं सुचारू रूप से क्रियान्वित होती रहीं, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में एक मज़बूत स्तंभ के रूप में उभरेगा।


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