
5 अगस्त 2025 को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब एनडीए संसदीय दल ने आतंकवाद के विरुद्ध एक निर्णायक और स्पष्ट नीति का संकल्प पारित किया। यह संकल्प न केवल भारत की सुरक्षा प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है, बल्कि यह दर्शाता है कि देश अब किसी भी प्रकार के आतंक और उसकी वैश्विक साजिशों के प्रति “शून्य सहिष्णुता नीति” पर अडिग है।
🛡️ संकल्प के केंद्रीय बिंदु:
- वीरता और बलिदान को नमन
“ऑपरेशन सिंदूर” और “ऑपरेशन महादेव” में भारतीय सैनिकों की वीरता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। यह दर्शाता है कि भारत अपने सशस्त्र बलों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को सदा स्मरण रखेगा। - आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि हर आतंकी हमले का माकूल जवाब दिया जाएगा — भारत की आत्मरक्षा अब प्रतिक्रिया नहीं, नीति बन चुकी है। - नाभिकीय धमकियों को नकारना
भारत किसी भी प्रकार के परमाणु ब्लैकमेल या डराने-धमकाने की चालों को सिरे से खारिज करता है। राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता पर कोई भी सौदेबाज़ी अब अस्वीकार्य है। - आतंक के प्रायोजकों की जवाबदेही
इस संकल्प में यह भी घोषित किया गया कि जो राष्ट्र या संगठन आतंक को पनाह या समर्थन देते हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब किया जाएगा और जवाबदेह ठहराया जाएगा।
🕊️ प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्र की एकता का प्रदर्शन
इस अभूतपूर्व बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की, जिसमें पहलगाम हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। यह क्षण एक राजनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा से जुड़ा एक भावपूर्ण संदेश था — “भारत अपने रक्षकों को कभी नहीं भूलता।”
🌐 भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि: एक निर्णायक राष्ट्र
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस संकल्प की सराहना करते हुए इसे भारत की अंतरराष्ट्रीय रणनीति में एक मजबूत कड़ी बताया। यह दर्शाता है कि भारत अब न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा कर रहा है, बल्कि वैश्विक आतंकवाद के विरुद्ध एक सशक्त आवाज बनकर उभर रहा है।
🎙️ निष्कर्ष:
भारत का यह संकल्प केवल एक कागज़ी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि 135 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा, गौरव और स्वतंत्रता की शपथ है। आतंक के हर चेहरे को बेनकाब करना अब केवल नीति नहीं, राष्ट्रीय धर्म बन चुका है।