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✍️ रेलवे और एसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का विरोध: ‘प्रोटेस्ट 2025’ की गूंज


नई दिल्ली, 5 अगस्त 2025 — देश की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी परीक्षाओं में गिनी जाने वाली रेलवे और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। राजधानी के शिक्षा हब मुखर्जी नगर में हाल ही में आयोजित कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन ने इस मुद्दे को एक नई दिशा दे दी है।

📌 क्या है पूरा मामला?

हाल के वर्षों में रेलवे और एसएससी की परीक्षाओं में तकनीकी खामियों, प्रश्नपत्र लीक, अनियमित मूल्यांकन और बार-बार परीक्षा स्थगन जैसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। छात्रों का कहना है कि इन गड़बड़ियों की वजह से लाखों युवा बेरोजगार बने बैठे हैं और उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है।

🔥 ‘प्रोटेस्ट 2025’ की शुरुआत

छात्रों ने अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए ‘प्रोटेस्ट 2025’ नामक अभियान की शुरुआत की है। यह आंदोलन न केवल एक विरोध है, बल्कि यह एक सामाजिक चेतना अभियान भी बनता जा रहा है, जिसमें शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की जा रही है।

मुखर्जी नगर, जो देशभर के कोचिंग छात्रों का केंद्र है, इस आंदोलन का मुख्य स्थल बनकर उभरा है। यहां छात्रों ने शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला और प्रशासन से परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की।

🙌 कौन कर रहा है समर्थन?

इस विरोध में रैंकर्स गुरुकुल जैसे प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों की टीम और कई सफल अभ्यर्थियों ने भी छात्रों का साथ दिया। उनका मानना है कि यदि अब आवाज नहीं उठाई गई, तो आने वाली पीढ़ियों को भी इसी प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

📣 छात्रों की प्रमुख मांगें:

  1. परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए
  2. उत्तर कुंजी (Answer Key) समय पर प्रकाशित हो
  3. पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो
  4. परिणाम जारी करने में देरी न की जाए
  5. एक निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सक्षम परीक्षा प्रणाली विकसित हो

🧠 क्या कहता है युवा वर्ग?

छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों की तैयारी में उन्होंने सालों की मेहनत झोंक दी है, लेकिन जब परीक्षा प्रणाली ही भरोसेमंद न हो, तो यह युवाओं के साथ अन्याय है। विरोध कर रहे छात्रों में एकता और अनुशासन का स्पष्ट उदाहरण देखने को मिला, जिससे यह आंदोलन सोशल मीडिया पर भी #Protest2025 ट्रेंड करने लगा।

निष्कर्ष

इस आंदोलन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि युवा सिर्फ नौकरी की तलाश में नहीं हैं, बल्कि एक समान अवसर और निष्पक्षता के लिए लड़ना भी जानते हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार इस आवाज को सुनेगी और देश की परीक्षा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।


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