
परिचय:
प्राचीन भारतीय चिकित्सा न केवल एक उपचार प्रणाली है, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र (होलिस्टिक) पद्धति है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा का संतुलन अत्यंत आवश्यक माना गया है। यह चिकित्सा परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है, जिसकी जड़ें वैदिक काल, ऋषियों की तपस्या और प्रकृति के गहन अध्ययन में समाहित हैं।
🌿 मुख्य चिकित्सा पद्धतियाँ:
1. आयुर्वेद (Ayurveda):
‘आयुर्वेद’ दो शब्दों से बना है – ‘आयु’ (जीवन) और ‘वेद’ (ज्ञान)। यह पद्धति शरीर को त्रिदोषों (वात, पित्त, कफ) के संतुलन से स्वस्थ रखने में विश्वास करती है। इसमें औषधियों के रूप में जड़ी-बूटियाँ, पंचकर्म, योग, आहार और दिनचर्या को विशेष महत्व दिया जाता है।
2. योग चिकित्सा:
योग केवल आसनों और प्राणायामों तक सीमित नहीं, बल्कि यह मानसिक और शारीरिक रोगों से बचाव और उपचार का भी साधन है। योगिक क्रियाएँ जैसे ‘शोधन क्रियाएँ’, ध्यान और संयम व्यक्ति के इम्यून सिस्टम को मजबूत करती हैं।
3. सिद्ध चिकित्सा (Siddha System):
तमिलनाडु क्षेत्र की यह पद्धति ‘सिद्धरों’ द्वारा विकसित की गई थी। इसमें धातु, खनिज, वनस्पति और पशु-उत्पादों का उपयोग कर के गूढ़ उपचार विधियाँ विकसित की गई थीं।
4. यूनानी चिकित्सा:
हिप्पोक्रेटीज़ के विचारों से प्रभावित यह चिकित्सा प्रणाली भारत में मुग़ल काल में आई और यहाँ की मिट्टी में रच-बस गई। यह चार तत्वों (खून, पित्त, बलगम और काला पित्त) के संतुलन पर आधारित होती है।
🍃 प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy):
प्राचीन भारत में मिट्टी, पानी, धूप और हवा को ही औषधि माना गया। व्रत, उपवास, सूर्यस्नान, जलचिकित्सा जैसी पद्धतियाँ आज भी लोकप्रिय हैं।
🧠 चिकित्सा और दर्शन का संबंध:
भारतीय चिकित्सा केवल रोग निवारण की बात नहीं करती, बल्कि आत्मा और ब्रह्मांड के बीच सामंजस्य को भी आवश्यक मानती है। ‘चरक संहिता’, ‘सुश्रुत संहिता’ जैसे ग्रंथों में चिकित्सा विज्ञान के साथ-साथ जीवनशैली, नैतिकता और मनोविज्ञान पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया है।
🏥 आज की दुनिया में प्राचीन चिकित्सा का महत्व:
आज के आधुनिक, तनावपूर्ण और रासायनिक दवाओं से भरे युग में प्राचीन भारतीय चिकित्सा पुनः लोकप्रिय हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी आयुर्वेद को मान्यता दी है। योग और आयुर्वेद को अब वैश्विक स्तर पर सम्मान प्राप्त हो रहा है।
🔚 निष्कर्ष:
प्राचीन भारतीय चिकित्सा केवल एक उपचार प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवनदर्शन है। यह हमें सिखाती है कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर, शरीर और मन के संतुलन को बनाकर, हम निरोग और सुखद जीवन जी सकते हैं। भारत की यह धरोहर आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है।