
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने हाल ही में संसद के उच्च सदन में एक अहम मामला उठाया है, जो देशभर के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की फेज-13 परीक्षा में व्यापक स्तर पर हुई अनियमितताओं को लेकर नियम 267 के तहत एक ‘सस्पेंशन ऑफ बिजनेस नोटिस’ दाखिल किया है। यह परीक्षा 24 जुलाई से 1 अगस्त 2025 के बीच आयोजित की गई थी।
📌 परीक्षा में तकनीकी और प्रशासनिक गड़बड़ियाँ
संजय सिंह के अनुसार, इस परीक्षा के दौरान कई गंभीर प्रकार की खामियाँ सामने आईं –
- कई केंद्रों पर सर्वर फेल होने के कारण परीक्षाएं समय पर शुरू नहीं हो पाईं।
- बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन में बार-बार त्रुटियाँ आईं, जिससे परीक्षार्थियों को घंटों इंतज़ार करना पड़ा।
- कई छात्रों की परीक्षाएं बिना किसी स्पष्ट कारण के रद्द कर दी गईं।
इन समस्याओं के चलते विद्यार्थियों में गहरा असंतोष और भविष्य को लेकर भय व्याप्त हो गया है।
🧑🎓 छात्रों का सड़कों पर विरोध
देश के विभिन्न राज्यों – विशेषकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान – में हजारों परीक्षार्थी सड़कों पर उतर आए हैं। उनकी माँग है कि केंद्र सरकार और SSC इस मामले की जांच करवाए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करे।
छात्रों का कहना है कि वे दिन-रात मेहनत कर ऐसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन जब परीक्षा व्यवस्था ही असफल हो जाए, तो उनका भरोसा पूरी प्रणाली से उठ जाता है।
🧭 भविष्य की परीक्षाओं पर असर
संजय सिंह ने अपने बयान में कहा कि ऐसी घटनाओं के चलते अब छात्र आगामी SSC CGL परीक्षा (13 अगस्त 2025) को लेकर भी आशंकित हैं। उन्होंने यह चिंता जताई कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में सरकारी नौकरियों में भर्ती की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठेंगे।
🔄 लगातार दोहराई जा रही हैं गलतियाँ
यह पहली बार नहीं है जब SSC परीक्षा को लेकर विवाद हुआ हो। पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियाँ और परीक्षा निरस्तीकरण जैसी घटनाएँ बार-बार सामने आई हैं। इससे न केवल छात्र प्रभावित होते हैं, बल्कि संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाता है।
💔 छात्रों को मानसिक और आर्थिक क्षति
इन अनियमितताओं से हज़ारों युवाओं को मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ, और करियर की अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। जो छात्र दूर-दराज़ से परीक्षा देने आए थे, उन्हें किराया, भोजन और यात्रा में भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
📢 सरकार को लेना होगा संज्ञान
यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रणाली को सुधारने और आधुनिक तकनीकों से सुरक्षित बनाने की ज़रूरत है। संजय सिंह ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे को हल्के में न लिया जाए और जल्द से जल्द छात्रों को न्याय दिलाने की दिशा में कदम उठाए जाएँ।
✍️ निष्कर्ष:
SSC फेज-13 परीक्षा में हुई अनियमितताएँ यह दर्शाती हैं कि हमारे परीक्षा तंत्र को समयानुकूल और भरोसेमंद बनाने की दिशा में ठोस पहल की आवश्यकता है। जब देश का युवा वर्ग ही असुरक्षित महसूस करने लगे, तो वह राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में कैसे भागीदारी निभा पाएगा? अब समय आ गया है कि छात्रों की आवाज को संसद से लेकर नीति-निर्माण की मेज़ तक पहुँचाया जाए।