HIT AND HOT NEWS

📈 भारत में रिटेल क्रेडिट की बढ़ती मांग: NBFCs के लिए निवेश विस्तार का सुनहरा अवसर


नई दिल्ली, 6 अगस्त 2025 — भारत के खुदरा ऋण (रिटेल क्रेडिट) क्षेत्र में लगातार बढ़ती मांग ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए नए द्वार खोल दिए हैं। क्रिसिल इंटेलिजेंस द्वारा जारी एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इस मांग में वृद्धि NBFCs को उनके निवेशक आधार को व्यापक बनाने का मौका दे रही है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय खुदरा ऋण बाजार ने हाल के वर्षों में लगातार और मज़बूत वृद्धि दर्ज की है, और यह रुझान आगामी वर्षों में भी जारी रहने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, “भारतीय खुदरा क्रेडिट बाजार में सकारात्मक भावनाओं और बढ़ती मांग के कारण बैंक और NBFCs दोनों के पास अपने निवेशक आधार को व्यापक करने का अवसर है।”

🔍 निवेश के नए स्रोतों की तलाश

जैसे-जैसे अधिक उपभोक्ता खुदरा ऋण प्रणाली से जुड़ रहे हैं, NBFCs को विभिन्न प्रकार के निवेशकों को आकर्षित करने और अपने फंडिंग स्रोतों में विविधता लाने का मौका मिल रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए अनुकूल है जो उपभोक्ताओं तक सीधे वित्तीय उत्पाद पहुंचा रही हैं।

📊 FY25-FY28 में 14-16% CAGR की उम्मीद

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय खुदरा क्रेडिट बाजार की विकास दर तेज़ी से बढ़ रही है और यह वित्तीय वर्ष 2025 से 2028 के बीच 14 से 16 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज कर सकता है। यह वृद्धि मुख्यतः हाउसिंग फाइनेंस, वाहन ऋण, गोल्ड लोन, शिक्षा ऋण, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की खरीद, व्यक्तिगत ऋण, क्रेडिट कार्ड और माइक्रोफाइनेंस जैसे क्षेत्रों से प्रेरित है।

💰 ₹82 ट्रिलियन तक पहुँचा खुदरा क्रेडिट

FY25 के अंत तक भारत में कुल खुदरा क्रेडिट ₹82 ट्रिलियन तक पहुँच चुका है, जो FY19 से FY25 के बीच 15.1% की मजबूत वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है। अकेले FY25 में ही खुदरा क्रेडिट में 14% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसकी प्रमुख वजह आवास और वाहन जैसे क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की मजबूत मांग रही।

🛒 उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव का असर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव, जैसे कि क्रेडिट कार्ड का बढ़ता उपयोग और व्यक्तिगत ऋणों की बढ़ती माँग, इस विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन ऋण सेवाओं की उपलब्धता ने भी खुदरा ऋण को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया है।

⚠️ रिटेल क्रेडिट कवरेज में अभी भी है कमी

हालांकि यह वृद्धि उल्लेखनीय है, रिपोर्ट में यह भी ज़िक्र किया गया है कि भारत में अभी भी रिटेल क्रेडिट की पहुँच में एक बड़ा अंतर है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज़ के इलाकों में वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता एक चुनौती बनी हुई है।


निष्कर्ष:
भारत का खुदरा क्रेडिट बाजार एक अभूतपूर्व विकास के दौर से गुजर रहा है, जो NBFCs और बैंकों के लिए अपार संभावनाएं लेकर आया है। यदि इस अवसर का सही उपयोग किया जाए, तो न केवल वित्तीय संस्थान सशक्त होंगे, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों को भी सुलभ और समावेशी वित्तीय सेवाओं का लाभ मिलेगा।


Exit mobile version