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🔬 सीओआरई एनर्जी सिस्टम्स को ₹200 करोड़ की पूंजी प्राप्त, भारत की परमाणु और रक्षा ताकत को मिलेगा नया बल


नई दिल्ली, 6 अगस्त:
भारत के परमाणु और रक्षा क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही मुंबई-स्थित सीओआरई एनर्जी सिस्टम्स लिमिटेड को हाल ही में एक अहम निवेश दौर में ₹200 करोड़ की भारी-भरकम राशि प्राप्त हुई है। यह निवेश कंपनी की रणनीतिक योजनाओं और भारत की ऊर्जा तथा रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस फंडिंग का नेतृत्व प्रमुख निवेशक पंकज प्रसूण, आशीष कचोलिया और कुछ अन्य रणनीतिक भागीदारों ने किया है, जो भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा लक्ष्यों के साथ गहरे जुड़ाव रखते हैं। यह नई पूंजी सीओआरई को अपने उत्पादन ढांचे, अनुसंधान क्षमताओं और तकनीकी नवाचारों के विकास में सहायता देगी।

🇮🇳 परमाणु ऊर्जा में भारत का भविष्य

वर्तमान में सीओआरई एनर्जी सिस्टम्स देश में 25 परमाणु रिएक्टरों के संचालन में अहम भूमिका निभा रही है, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 8.88 गीगावाट है। इसके अतिरिक्त, 8 नए रिएक्टर निर्माणाधीन हैं। कंपनी का लक्ष्य भारत सरकार के उस महत्वाकांक्षी रोडमैप का हिस्सा बनना है, जिसके तहत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन की योजना है — यह ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना और नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों का अहम स्तंभ है।

🧪 स्वदेशी तकनीक और अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा

कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एमी बेलोर्कर ने कहा,

“सीओआरई एकमात्र ऐसी भारतीय कंपनी है जो मिशन-आधारित डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग (एमडीएवीएफ) जैसी विशिष्ट स्वदेशी तकनीक का उपयोग करती है। रक्षा और परमाणु जैसे अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में इसकी भूमिका भारत की रणनीतिक सक्षमता का प्रमाण है।”

सीओआरई वर्तमान में भारत की सबसे पुरानी परमाणु इकाई — 1969 में चालू हुआ तारापुर संयंत्र — में एक अत्यंत जटिल और ऐतिहासिक परियोजना को अंतिम रूप देने के करीब है। यह कार्य संयंत्र के जीवनकाल को बढ़ाने के साथ-साथ भारत को परमाणु प्लांट जीवन विस्तार तकनीक में वैश्विक अग्रणी के रूप में प्रस्तुत करेगा।

🛡️ राष्ट्रीय सुरक्षा और गुणवत्ता का संतुलन

सीओआरई के प्रबंध निदेशक नागेश बसार्कर ने कहा,

“परमाणु क्षेत्र में कोई भी चूक या समझौता अस्वीकार्य होता है। गुणवत्ता, सुरक्षा और सटीकता हमारे कार्य के मूल में हैं। यह निवेश हमें इन मूल्यों को बनाए रखते हुए देश के भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं की योजना को मजबूती देने की प्रेरणा देता है।”

🔧 आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम

इस महत्वपूर्ण फंडिंग से सीओआरई को रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताओं को विस्तार देने का अवसर मिलेगा, जिससे भारत की रणनीतिक स्वावलंबन नीति को और बल मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी रूप से स्वतंत्र और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।


निष्कर्ष:
सीओआरई एनर्जी सिस्टम्स द्वारा प्राप्त यह ₹200 करोड़ की फंडिंग न केवल कंपनी की विकास यात्रा को गति देगी, बल्कि भारत के ऊर्जा सुरक्षा, स्वदेशी रक्षा निर्माण और कार्बन-मुक्त भविष्य के लक्ष्य की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी।


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