
नई दिल्ली, 6 अगस्त 2025:
मशहूर यूट्यूबर और सोशल मीडिया स्टार एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी अस्थायी राहत मिली है। नोएडा में आयोजित कथित रेव पार्टी और उसमें वन्य जीवों के ज़हर के इस्तेमाल के गंभीर आरोपों के चलते उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।
क्या है पूरा मामला?
बीते वर्ष नोएडा में एक कथित रेव पार्टी का आयोजन हुआ था, जिसमें सांप के ज़हर के अवैध प्रयोग और नशीले पदार्थों के इस्तेमाल का आरोप लगा था। इस पार्टी से जुड़े वीडियो और साक्ष्य सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसमें एल्विश यादव की कथित रूप से उपस्थिति बताई गई।
इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने एल्विश और अन्य के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, भारतीय दंड संहिता (IPC) और एनडीपीएस एक्ट की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया।
अदालत की दखल
एल्विश यादव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका में उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज चार्जशीट और समन को रद्द करने की मांग की।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंद्रेश और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की पीठ ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता पक्षों को नोटिस जारी किए और जवाब मांगा।
किन कानूनों के तहत दर्ज हुआ था मामला?
एल्विश यादव पर निम्नलिखित धाराएं लगाई गई थीं:
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: धारा 9, 39, 48A, 49, 50, 51
- IPC: धारा 284 (विषैले पदार्थों से खतरा), 289 (लापरवाही), 120B (षड्यंत्र)
- NDPS एक्ट: धारा 8, 22, 29, 30, 32
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद यह स्पष्ट किया कि मामले में अंतिम निर्णय आने तक कोई दंडात्मक कार्यवाही नहीं होगी। यानी, न तो एल्विश यादव की गिरफ्तारी की जाएगी और न ही उन्हें अदालत में पेश होने के लिए बाध्य किया जाएगा – यह एक अस्थायी राहत है, न कि अंतिम फैसला।
निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम एल्विश यादव के लिए एक कानूनी राहत अवश्य है, लेकिन मामले की प्रकृति गंभीर और संवेदनशील बनी हुई है। अगली सुनवाई में अदालत सभी पक्षों के जवाबों पर विचार करेगी, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।