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ऑन्कोलॉजी में रोबोटिक सर्जरी: कैंसर उपचार में एक क्रांतिकारी बदलाव


बेंगलुरु (कर्नाटक), 6 अगस्त 2025:
कैंसर आज भी विश्वभर में सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बना हुआ है, जिसके प्रभावी इलाज और निदान के लिए लगातार तकनीकी नवाचारों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी कड़ी में, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में एक अहम उपलब्धि के रूप में रोबोटिक सर्जरी को देखा जा रहा है, विशेष रूप से ऑन्कोलॉजी यानी कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में।

यह अत्याधुनिक तकनीक रोबोटिक्स की सटीकता को मिनिमली इनवेसिव सर्जरी (कम चीरे वाली सर्जरी) के फायदों के साथ जोड़ती है। इसके परिणामस्वरूप मरीजों को तेज़ी से ठीक होने, कम दर्द, और न्यूनतम जटिलताओं के साथ बेहतर परिणाम मिलते हैं।

रोबोटिक सर्जरी क्या है?

ऑन्कोलॉजी में रोबोटिक सर्जरी का अर्थ है – रोबोटिक सिस्टम की मदद से कैंसर सर्जरी को अधिक सटीकता और नियंत्रण के साथ अंजाम देना। पारंपरिक ओपन सर्जरी में जहां बड़े चीरे की आवश्यकता होती है, वहीं रोबोटिक सर्जरी में छोटे छेद (पोर्ट्स) के ज़रिए सर्जिकल उपकरण और कैमरे शरीर में डाले जाते हैं।

इस प्रक्रिया में डॉक्टर रोबोट को दूर से नियंत्रित करता है, जिससे जटिल अंगों तक सटीक पहुंच संभव होती है।

प्रमुख तकनीक: दा विंची सर्जिकल सिस्टम

सबसे अधिक उपयोग में लाया जाने वाला रोबोटिक सिस्टम है दा विंची सर्जिकल सिस्टम, जो सर्जनों को निम्नलिखित विशेषताएं प्रदान करता है:

कैंसर उपचार में रोबोटिक सर्जरी क्यों है क्रांतिकारी?

कैंसर सर्जरी में ट्यूमर को पूरी तरह से हटाना और स्वस्थ ऊतकों को बचाना अत्यंत आवश्यक होता है। रोबोटिक सर्जरी पारंपरिक तरीकों की तुलना में कई लाभ प्रदान करती है:

1. न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया:

2. सर्जन को अधिक नियंत्रण और सटीकता:

3. मरीजों के लिए अधिक सुरक्षा और सफलता की संभावना:

भविष्य की दिशा

आने वाले समय में रोबोटिक सर्जरी और भी उन्नत होती जा रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग, और इमेज-गाइडेड नेविगेशन जैसी तकनीकों के साथ इसका एकीकरण कैंसर उपचार को और अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी बना सकता है।


निष्कर्ष:
ऑन्कोलॉजी में रोबोटिक सर्जरी केवल एक तकनीकी उन्नति नहीं, बल्कि यह कैंसर मरीजों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है। यह न केवल सर्जनों को बेहतर नियंत्रण देती है, बल्कि मरीजों को तेज़ी से स्वस्थ होने का अवसर भी प्रदान करती है। भारत जैसे विकासशील देशों में भी इसका तेजी से अपनाया जाना, स्वास्थ्य प्रणाली में एक सकारात्मक परिवर्तन की ओर संकेत करता है।


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