
काबुल/जकार्ता — वर्षों से संघर्ष और आर्थिक संकट झेल रहे अफगानिस्तान के बच्चों के लिए एक नई आशा की किरण इंडोनेशिया से आई है। इंडोनेशिया सरकार ने विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) को 3.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की है, जिसका उद्देश्य प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले लगभग दो लाख बच्चों को पोषण युक्त बिस्कुट उपलब्ध कराना है।
यह सहयोग न केवल खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे बच्चों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि शिक्षा में निरंतरता बनाए रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। अफगानिस्तान में जारी मानवीय संकट के बीच, जब अधिकांश अंतरराष्ट्रीय सहायता सीमित हो गई है, इंडोनेशिया की यह पहल उल्लेखनीय और प्रेरणादायक बन गई है।
🎒 स्कूल फीडिंग प्रोग्राम: शिक्षा को बनाए रखने की कुंजी
विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा चलाए जा रहे इस स्कूल फीडिंग कार्यक्रम का मकसद है — कुपोषण से लड़ना और बच्चों को स्कूल में बनाए रखना। इन पौष्टिक बिस्किटों में जरूरी विटामिन्स और खनिज तत्व शामिल हैं, जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए आवश्यक हैं। यह कदम विशेष रूप से उन इलाकों में अहम साबित हो रहा है, जहां परिवारों के लिए भोजन और शिक्षा दोनों की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो चुका है।
🤝 इंडोनेशिया की भूमिका: एक उदाहरण
इंडोनेशिया का यह सहयोग केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि वैश्विक दक्षिण (Global South) के देश भी मानवीय जिम्मेदारियों में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। यह कदम अफगानिस्तान जैसे संकटग्रस्त देश में उम्मीद और साझेदारी का संदेश देता है।
इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय ने इस सहायता को “इस्लामी एकजुटता और मानवीय कर्तव्य” का प्रतीक बताया है। उन्होंने यह भी दोहराया कि अफगान बच्चों की शिक्षा और भविष्य को संवारने के लिए इंडोनेशिया आगे भी योगदान देता रहेगा।
निष्कर्ष:
जब अफगानिस्तान जैसे देश खाद्य और शिक्षा संकट से जूझ रहे हैं, तब इंडोनेशिया जैसी उभरती अर्थव्यवस्था द्वारा दिया गया यह योगदान न केवल बच्चों के लिए पोषण का साधन है, बल्कि उनके भविष्य की नींव को भी मजबूत करता है। यह कार्य वैश्विक सहानुभूति और सहयोग का आदर्श उदाहरण है।