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फर्जी बैंक गारंटी मामला: पार्थ सारथी बिस्वाल छह दिन की ईडी हिरासत में


नई दिल्ली, 7 अगस्त 2025 — फर्जी बैंक गारंटी के एक जटिल आर्थिक अपराध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पार्थ सारथी बिस्वाल को छह दिन की हिरासत में लेकर पूछताछ की अनुमति प्राप्त कर ली है। यह मामला लगभग ₹68 करोड़ की एक फर्जी बैंक गारंटी से संबंधित है, जो कथित तौर पर एक निजी कंपनी को प्रदान की गई थी।

कौन हैं पार्थ सारथी बिस्वाल?

पार्थ सारथी बिस्वाल, भुवनेश्वर स्थित बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड (BTPL) के प्रबंध निदेशक हैं। ईडी के अनुसार, उन्होंने सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SECI) को एक नकली बैंक गारंटी सौंपकर अनुचित लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि बिस्वाल और उनके सहयोगियों ने इस प्रक्रिया में जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।

ईडी की कार्रवाई और हिरासत की आवश्यकता

ईडी ने बिस्वाल को 1 अगस्त 2025 को मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA) के अंतर्गत गिरफ्तार किया था। इसके बाद 6 अगस्त को अदालत में पेश किया गया, जहां विशेष न्यायाधीश किरण गुप्ता ने उन्हें 12 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

ईडी का कहना है कि बिस्वाल द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं, जिनका विश्लेषण अभी शेष है। अधिकारियों का यह भी दावा है कि बिस्वाल पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे और लगातार भ्रमित करने वाले उत्तर दे रहे हैं।

फर्जीवाड़े की परतें और डिजिटल प्रमाण

ईडी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, बिस्वाल द्वारा प्रस्तुत की गई बैंक गारंटी पूरी तरह से फर्जी थी और उसका उद्देश्य एक सरकारी अनुबंध प्राप्त करना था। जांच एजेंसी के हाथ लगे डिजिटल दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि इस फर्जीवाड़े में कई बैंक खातों के माध्यम से धन का प्रवाह हुआ है।

इसके अलावा, यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस लेन-देन के पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा था, जो सरकारी और निजी संस्थाओं को नकली गारंटी देकर आर्थिक लाभ कमाने की योजना पर काम कर रहा था।

आगे की कार्रवाई

अब ईडी की टीम बिस्वाल से पूछताछ के दौरान यह जानने की कोशिश करेगी कि इस अपराध में और कौन-कौन शामिल हैं, और इस गारंटी के जरिये मिले “अपराध की आय” (Proceeds of Crime) को कैसे और कहां छिपाया गया है।

ईडी को उम्मीद है कि हिरासत में पूछताछ से उन्हें पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में मदद मिलेगी और मनी ट्रेल (धन के प्रवाह) को ट्रैक कर दोषियों को कानून के कठघरे में लाया जा सकेगा।


निष्कर्ष:
यह मामला न केवल एक व्यक्ति द्वारा आर्थिक धोखाधड़ी का है, बल्कि यह इंगित करता है कि किस प्रकार फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से देश की संस्थाओं को चकमा देने की कोशिश की जा रही है। ईडी की इस सख्त कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि देश में आर्थिक अपराधों के खिलाफ कड़ी निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।


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