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अमेरिका द्वारा आर्थिक दबाव की रणनीति: राहुल गांधी का तीखा आरोप


नई दिल्ली, 6 अगस्त 2025 – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने अमेरिका की हालिया व्यापारिक नीति पर गहरी आपत्ति जताते हुए उसे भारत के लिए एक “आर्थिक ब्लैकमेल” की संज्ञा दी है। उन्होंने यह आरोप ऐसे समय में लगाया है जब अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है।

राहुल गांधी ने इस कदम को भारत की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया और कहा कि यह मोदी सरकार की विदेश नीति की विफलता का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह टैरिफ दबाव भारत को एक अनुचित और एकतरफा व्यापार समझौते की ओर झुकाने का एक सुनियोजित प्रयास है, जो देश के दीर्घकालिक आर्थिक हितों के प्रतिकूल है।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:

“भारत की विदेश नीति अब आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान से दूर होती जा रही है। अमेरिका द्वारा लगाया गया अतिरिक्त टैरिफ एक आर्थिक धमकी है, जिसके पीछे दबाव बनाकर भारत से ऐसा व्यापार समझौता करवाना है, जो हमारी जनता और उद्योगों के हित में नहीं होगा।”

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए यह भी कहा कि सरकार की चुप्पी और झुकावपूर्ण रवैया भारत को वैश्विक मंच पर कमजोर कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सरकार अब भारत की आर्थिक स्वतंत्रता को विदेशी दबावों के सामने गिरवी रख चुकी है?

इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है, बल्कि देश के व्यापारिक जगत में भी चिंता की लहर दौड़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत ने दबाव में आकर कोई असमान व्यापार समझौता किया, तो इससे घरेलू उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

निष्कर्ष:
राहुल गांधी का यह आरोप भारत की विदेश नीति, व्यापार स्वतंत्रता और संप्रभुता से जुड़े गहरे प्रश्न उठाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इस विषय में क्या रुख अपनाती है – क्या वह राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अडिग रहेगी या वैश्विक दबाव के आगे झुकेगी?


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