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दृश्यम 2′ के वितरण अधिकारों पर वित्तीय विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्माता की याचिका खारिज की


नई दिल्ली, 7 अगस्त 2025 – अजय देवगन अभिनीत फिल्म ‘दृश्यम 2’ के अंतरराष्ट्रीय वितरण अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय विवाद अब अदालत की चौखट पर पहुंच चुका है। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्माता कुमार मंगत पाठक द्वारा दाखिल की गई याचिका को खारिज करते हुए कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया है। पाठक, जो पैनोरमा स्टूडियोज के निदेशक हैं, ने अदालत से आग्रह किया था कि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द किया जाए, जो फिल्म के चीन, हांगकांग और ताइवान में वितरण अधिकारों को लेकर हुए एक कथित धोखाधड़ी से संबंधित है।

यह विवाद तब उभरा जब एक दिल्ली-स्थित व्यवसायी ने आरोप लगाया कि उसे ₹4.3 करोड़ का निवेश करने के लिए मजबूर किया गया, वो भी कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसे विश्वास दिलाया गया था कि उसे ‘दृश्यम 2’ के लिए चीनी भाषा में वितरण के विशेष अधिकार मिलेंगे। यह प्रस्ताव उसे भरत सेवक नामक एक व्यक्ति द्वारा दिया गया था, जिसने खुद को पैनोरमा स्टूडियोज का अधिकृत प्रतिनिधि और एक खनिज कंपनी Terra Bento Mines & Minerals का भागीदार बताया।

भरत सेवक पर आरोप है कि उसने एक टर्म शीट बनाई और निर्माता कुमार मंगत पाठक सहित पैनोरमा स्टूडियोज के अन्य सदस्यों से मीटिंग करवाई। शिकायत के अनुसार, व्यवसायी को यह भी वादा किया गया था कि उसे फिल्म की बिक्री से होने वाले मुनाफे में हिस्सा मिलेगा।

हालांकि, बाद में सेवक ने यह दावा किया कि उसने ₹16.40 करोड़ के कुल समझौते में से ₹15.75 करोड़ का भुगतान कर दिया था। लेकिन पैनोरमा स्टूडियोज ने इससे इनकार करते हुए कहा कि उन्हें कोई रकम नहीं मिली और पूरी राशि किसी असंबंधित खाते में स्थानांतरित कर दी गई।

पाठक की ओर से दाखिल याचिका में दावा किया गया कि यह विवाद केवल व्यावसायिक प्रकृति का है और इसमें आपराधिक मामला नहीं बनता। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है और अन्य कानूनी रास्तों पर भी काम कर रहे हैं।

लेकिन न्यायमूर्ति नीना कृष्णा बंसल ने यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि जांच अभी प्रारंभिक अवस्था में है और फिलहाल कोई अंतरिम राहत देना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब तक जांच एजेंसियां अपनी प्रक्रिया पूरी नहीं कर लेतीं, तब तक अदालत को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।


निष्कर्ष:
‘दृश्यम 2’ से जुड़ा यह विवाद फिल्म इंडस्ट्री में निवेश, अधिकारों के हस्तांतरण और वितरक सौदों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। कोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता की कमी और फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग अब केवल व्यावसायिक नुकसान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपराधिक दायरे में भी लाया जा सकता है।


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