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भारतीय राजनीति में ‘वोट चोरी’ विवाद फिर से सुर्खियों में


भारतीय राजनीतिक माहौल में ‘वोट चोरी’ का मुद्दा एक बार फिर से गरमा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर एक पोस्ट जारी कर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि “वोट चोरी महज़ एक चुनावी अनियमितता नहीं, बल्कि यह संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ एक गहरी साजिश और विश्वासघात है। देश के अपराधियों को यह स्पष्ट संदेश मिलना चाहिए कि समय बदलेगा और इस षड्यंत्र में शामिल हर व्यक्ति को उसके अपराध की सज़ा मिलेगी।”

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1,00,250 नकली वोट दर्ज किए गए, ताकि कर्नाटक की बेंगलुरु लोकसभा सीट पर भाजपा को विजय मिल सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस कथित धोखाधड़ी को रोकने में चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत रही, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार सत्ता में आने का रास्ता साफ हुआ।

यह बयान सीधे-सीधे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। राहुल गांधी का आरोप है कि नरेंद्र मोदी बेहद मामूली अंतर से प्रधानमंत्री बने और चुनाव आयोग भाजपा को लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने में सहयोग दे रहा है। उन्होंने तीखा आरोप लगाते हुए कहा, “चुनाव आयोग हमें सही तरीके से अपना वोट डालने तक का अवसर नहीं दे रहा है।”

इस मुद्दे ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष जहां चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इन दावों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर रहा है। अब नज़र इस पर है कि क्या इन आरोपों की कोई आधिकारिक जांच होगी या यह मामला महज़ राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रह जाएगा।
निस्संदेह, यह विवाद भारतीय लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था के भविष्य के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।


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