
भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग, खासकर ग्रामीण इलाकों में, साँप के काटने का शिकार होते हैं। यह एक ऐसी आपात स्थिति है, जिसमें सही समय पर उचित कदम उठाना जीवन और मौत के बीच का फ़र्क तय कर सकता है। विशेषज्ञों और स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर, आइए जानते हैं कि ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए और किन गलतियों से बचना आवश्यक है।
✅ क्या करें (DO’s)
- शांत रहें और पीड़ित को भरोसा दें – डर और घबराहट ज़हर को शरीर में तेज़ी से फैला सकते हैं, इसलिए मन को स्थिर रखना जरूरी है।
- साँप से दूरी बनाएं – उसे छेड़ने, मारने या पकड़ने की कोशिश न करें, इससे खतरा बढ़ सकता है।
- घाव से छेड़छाड़ न करें – काटे गए हिस्से को न दबाएं, न चूसें और न धोएं, इससे हालत बिगड़ सकती है।
- तंग वस्तुएं हटाएं – अंगूठी, कंगन, जूते, बेल्ट या घड़ी जैसी चीज़ें तुरंत निकाल दें ताकि सूजन से रक्त प्रवाह बाधित न हो।
- पीड़ित को स्थिर मुद्रा में लिटाएं – उसे करवट में इस तरह लिटाएं कि सांस लेने में आसानी हो और शरीर का प्रभावित हिस्सा दिल के स्तर से नीचे रहे।
- तुरंत अस्पताल पहुंचाएं – समय बर्बाद किए बिना निकटतम स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं, क्योंकि एंटी-स्नेक वेनम वहीं उपलब्ध होता है।
❌ क्या न करें (DON’Ts)
- अनावश्यक हलचल से बचाएं – चलना-फिरना या भागना ज़हर के तेजी से फैलने का कारण बन सकता है।
- साँप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें – यह आपकी सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है और समय भी गंवा सकता है।
- घाव पर किसी रसायन या हर्बल पेस्ट का इस्तेमाल न करें – यह नुकसानदेह हो सकता है और संक्रमण फैला सकता है।
- काटे गए हिस्से को कसकर न बांधें – इससे खून का बहाव रुक सकता है और अंग खोने का खतरा बढ़ जाता है।
- पीड़ित को पीठ के बल न लिटाएं – इससे सांस लेने में रुकावट आ सकती है।
- झाड़-फूंक या अप्रमाणित घरेलू इलाज न अपनाएं – इससे कीमती समय बर्बाद होगा और जान को खतरा बढ़ेगा।
🏥 निष्कर्ष
साँप के काटने पर घबराने के बजाय सही दिशा में तेज़ और सतर्क कदम उठाना ही जीवन बचाने की सबसे बड़ी कुंजी है। यदि हम इन सावधानियों को याद रखें और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें, तो गंभीर नुकसान और मृत्यु दोनों से बचा जा सकता है। यह जानकारी न केवल आपके लिए, बल्कि आपके आसपास के लोगों के लिए भी जीवनरक्षक साबित हो सकती है।