
नई दिल्ली:
दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर क्राइम शाखा ने ऑनलाइन धोखाधड़ी में लिप्त एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गैंग लोगों को इंटरनेट पर छोटे-छोटे काम और निवेश के बहाने फंसाकर लाखों रुपये हड़प लेता था। पुलिस ने राजस्थान के जोधपुर और बालोतरा से पांच आरोपियों को दबोचा है।
गिरफ्तार आरोपियों में रविंद्र विश्नोई, महिपाल, मोहम्मद यासीन, रोहित निंबवात और यश वैष्णव शामिल हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि ये लोग साइबर क्राइम नेटवर्क को संचालित करने के लिए फर्जी सिम कार्ड, बैंक खातों और कई तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल करते थे।
ठगी का तरीका
गिरोह ने एक नकली वेबसाइट तैयार की थी, जिस पर वे लोगों को गूगल रिव्यू या अन्य छोटे ऑनलाइन टास्क पूरे करने का लालच देते थे। शुरुआत में प्रतिभागियों को मामूली भुगतान किया जाता, जिससे उनका भरोसा जीत लिया जाता। इसके बाद उन्हें “VIP यूज़र” बनने के नाम पर हजारों रुपये निवेश करने के लिए उकसाया जाता।
एक पीड़ित की शिकायत में बताया गया कि उसे “971 CBQE” नामक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया, जहां प्रति गूगल रिव्यू ₹50 देने का वादा किया गया था। पहले ₹2,000 निवेश करने को कहा गया, फिर ₹15,000 और उसके बाद क्रमशः ₹30,000, ₹90,100 और ₹1,60,000 की राशि जमा करवाई गई।
जब पीड़ित के अकाउंट में ₹3,62,650 दिखने लगे, तो पैसे निकालने से रोक दिया गया और “तकनीकी समस्या” का बहाना बनाया गया। रकम वापस पाने के लिए उससे और ₹4,36,325 मांगे गए। इस तरह पीड़ित कुल ₹17,31,425 गंवा बैठा।
बरामदगी और चेतावनी
पुलिस ने छापेमारी में 10 मोबाइल फोन, 12 प्रॉक्सी सिम, 7 बैंक अकाउंट, 2 जियो राउटर, 2 डेबिट कार्ड और 3 संदिग्ध पहचान पत्र जब्त किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता है।
लोगों को चेतावनी दी गई है कि किसी भी ऑनलाइन काम या निवेश के प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी तरह से जांच-पड़ताल करें और बिना पुष्टि के किसी भी लिंक, ग्रुप या वेबसाइट पर भरोसा न करें।