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बिहार में मसौदा मतदाता सूची पर चुनाव आयोग का बयान — “न किसी पार्टी ने आपत्ति जताई, न दावा किया”


पटना: बिहार में मसौदा मतदाता सूची को लेकर जारी विवाद के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने फिर से अपनी स्थिति साफ कर दी है। आयोग ने कहा कि 1 अगस्त को जारी की गई इस सूची पर किसी भी राजनीतिक दल ने अब तक न तो कोई आपत्ति दर्ज कराई है और न ही कोई दावा पेश किया है। सूची जारी होने के बाद आयोग ने लोगों को शिकायत या दावा करने के लिए सात दिन का समय दिया था।

आयोग के अनुसार, उसे सीधे तौर पर कुल 6,257 दावे और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं, जिन्हें जांच और निपटारे के लिए संबंधित अधिकारियों के पास भेजा गया है। इसके साथ ही, 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के 36,060 नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए आवेदन भी प्राप्त हुए हैं, जिन पर प्रक्रिया चल रही है।

स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (Special Intensive Revision – SIR) के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि मसौदा सूची से किसी भी मतदाता का नाम बिना ठोस कारण और विस्तृत जांच के नहीं हटाया जाएगा। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) को यह अधिकार है कि वे उचित सुनवाई और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही नाम हटाने या जोड़ने का निर्णय लें।

इस बीच, विपक्षी दलों ने आयोग की इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि यह तरीका मतदाताओं के नाम हटाने की योजना का हिस्सा हो सकता है। वे इस मुद्दे को संसद के मानसून सत्र में उठाने की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी आयोग पर गंभीर आरोप लगाए, जिन्हें आयोग ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।

चुनाव आयोग ने जोर देकर कहा कि उसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे और कोई भी अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। साथ ही, आयोग ने दोहराया कि वह बिहार में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


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