
जम्मू (जम्मू-कश्मीर), 8 अगस्त 2025 — आज जम्मू-कश्मीर में सीमा पर तैनात बहादुर BSF जवानों और देश के नन्हे नागरिकों के बीच एक अनोखा और भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक पहुंचे और रक्षाबंधन का त्योहार अपने इन रक्षकों के साथ मनाया। यह अवसर इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि यह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद मनाया गया पहला रक्षाबंधन था।
कुछ समय पहले संपन्न हुए ऑपरेशन सिंदूर में सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने पाकिस्तान की नापाक हरकतों का डटकर जवाब दिया था। इस कार्रवाई ने न केवल सीमा पर तनाव को कम किया, बल्कि पूरे देश में सुरक्षा और विश्वास की नई लहर पैदा की। इस जीत के बाद पहली बार देश के भविष्य — यानी बच्चों — ने देश के वर्तमान और प्रहरी — यानी जवानों — की कलाई पर राखी बांधकर उनका सम्मान किया।
रंग-बिरंगी राखियां, जिन पर तिरंगे के रंग और देशभक्ति के संदेश सजे थे, बच्चों ने खुद अपने हाथों से बनाई थीं। इन राखियों को पाकर जवानों के चेहरों पर गर्व और खुशी दोनों छलक पड़ीं। माहौल में देशभक्ति के गीत गूंज रहे थे और हर तरफ अपनापन और भाईचारे की भावना थी।
एक BSF जवान ने भावुक होकर कहा,
“बच्चों का यह स्नेह और विश्वास हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान है। यह राखी सिर्फ धागा नहीं, बल्कि देश की एकता और हमारे प्रति लोगों के भरोसे का प्रतीक है।”
यह कार्यक्रम सीमावर्ती इलाकों में एकजुटता और देशप्रेम को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। नन्हे हाथों से बंधी राखियों ने जवानों का मनोबल और भी ऊँचा कर दिया।
यह रक्षाबंधन केवल एक पर्व का उत्सव नहीं, बल्कि उस अदृश्य डोर का भी जश्न था जो हर नागरिक को अपने सैनिकों से जोड़ती है — विश्वास, सुरक्षा, और राष्ट्रप्रेम की डोर।