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कृषि बिल मामले में हिमाचल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, कर्मचारियों को OPS का लाभ


शिमला, 8 अगस्त: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम और दूरगामी असर डालने वाला निर्णय सुनाते हुए राज्य के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ देने का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी को सरकार ने वर्क चार्ज पद पर सेवाएं दी हैं, तो इस आधार पर उसके सेवा लाभों को नकारा नहीं जा सकता।

न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की एकल पीठ ने यह फैसला 2024 की सीडब्ल्यूपी संख्या 193 में दिया, जो नरेंद्र कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य से संबंधित था। नरेंद्र कुमार को जनवरी 1990 में दैनिक वेतन भोगी के तौर पर नियुक्त किया गया था और वर्ष 2006 में उनकी नियमित सेवा शुरू हुई। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना के अंतर्गत लाभ पाने के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन सरकार ने उन्हें नई पेंशन योजना (NPS) में शामिल करने का प्रस्ताव दिया था।

अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि वर्क चार्ज के रूप में दी गई सेवा को भी पेंशन लाभों में गिना जाना चाहिए। इस प्रकार, केवल वर्क चार्ज स्थिति का हवाला देकर लाभ रोकना अनुचित और अवैध है।

इस फैसले ने उन हजारों कर्मचारियों में उत्साह भर दिया है, जो लंबे समय से OPS की बहाली की मांग कर रहे थे। न्यायालय ने सरकार के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि 2003 के बाद नियमित हुए कर्मचारी OPS के पात्र नहीं हैं। कोर्ट ने माना कि नरेंद्र कुमार की छह वर्ष की वर्क चार्ज सेवा 2003 से पहले की मानी जाएगी और उसे पेंशन के लिए गिना जाएगा।

यह निर्णय न केवल हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत है, बल्कि यह कर्मचारियों के अधिकारों और सेवा लाभों की सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।


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