
गांधीनगर (गुजरात) [भारत], 8 अगस्त – विश्व शेर दिवस 2025 के अवसर पर गुजरात ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वह वन्यजीव संरक्षण में देश का अग्रणी राज्य है। इस मौके पर राज्य सरकार ने बरडा अभयारण्य को एशियाई शेरों के लिए एक मजबूत वैकल्पिक आवास के रूप में प्रस्तुत किया। यह जानकारी गुजरात मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में दी गई।
2023 में हुई वन्यजीव गणना के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, बरडा अभयारण्य में अब 17 एशियाई शेर (जिनमें शावक भी शामिल हैं) और 25 तेंदुओं की स्थिर और स्वस्थ आबादी पाई जाती है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में वन एवं पर्यावरण विभाग ने इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी वाला दृष्टिकोण अपनाया। इस सुनियोजित प्रयास ने बरडा को वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित और टिकाऊ आवास में बदल दिया है।
गुजरात में एशियाई शेरों के संरक्षण की यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के सिद्धांत को साकार करती है—जहां प्रगति और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलते हैं। राज्य में अपनाई गई यह रणनीति दर्शाती है कि आर्थिक विकास और प्राकृतिक धरोहर की रक्षा एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।
अभयारण्य में घासभूमि का पुनर्जीवन, शिकार प्रजातियों की संख्या में वृद्धि और आधुनिक तकनीक से वन्यजीवों की निगरानी जैसे व्यापक उपायों ने इसकी वहन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार किया है। यह प्रयास प्रधानमंत्री मोदी के प्रोजेक्ट लायन के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसके तहत गिर से बाहर शेरों के लिए नए आवास क्षेत्रों का विकास, वन्यजीव स्वास्थ्य सुरक्षा और दीर्घकालिक पारिस्थितिक संतुलन पर जोर दिया गया है।
बरडा अभयारण्य की यह उपलब्धि न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। यहां की बढ़ती शेर और तेंदुए की आबादी इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा, वैज्ञानिक सोच और सामुदायिक सहयोग से वन्यजीव संरक्षण के लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किए जा सकते हैं।