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इजरायल-हमास संघर्ष पर यूरोपीय संघ की दुविधा: वॉन डेर लेयेन ने युद्धविराम और मानवीय सहायता पर दिया जोर


यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद यूरोपीय संघ (EU) ने बिना किसी मतभेद के कीव को सैन्य और आर्थिक मदद दी थी। लेकिन इजरायल और हमास के बीच जारी टकराव के मामले में तस्वीर कुछ अलग है। इस मुद्दे पर यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेद मौजूद हैं।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई की दिशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां चल रहे अभियान को और आगे बढ़ाने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी बंधकों को, जिन्हें असहनीय परिस्थितियों में कैद रखा गया है, तत्काल रिहा किया जाए और गाजा में मानवीय सहायता बिना किसी बाधा के पहुंचने दी जाए।

गाजा में लगातार बिगड़ते हालात पर वॉन डेर लेयेन ने कहा कि अब समय आ गया है जब युद्धविराम लागू होना चाहिए। उन्होंने इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करते हुए भी मानवीय आधार पर युद्धविराम की आवश्यकता को रेखांकित किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति यूरोपीय संघ के लिए अत्यंत संवेदनशील है। कुछ सदस्य देश इजरायल के साथ खड़े हैं, जबकि अन्य फिलिस्तीन के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हैं। यही कारण है कि EU के लिए एक समान और संतुलित नीति बनाना कठिन हो गया है।

वॉन डेर लेयेन के बयानों से यह संकेत मिलता है कि यूरोपीय संघ केवल दर्शक नहीं, बल्कि समाधान खोजने में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। उन्होंने इजरायल से आग्रह किया कि वह अपने सैन्य अभियानों पर पुनर्विचार करे और गाजा में राहत सामग्री पहुंचाने में सहयोग करे।

उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक शांति बनाए रखने के लिए “दो-राज्य समाधान” ही स्थायी रास्ता है। उनके अनुसार, यूरोपीय संघ को दोनों पक्षों से सीधी बातचीत करके स्थायी शांति के लिए काम करना चाहिए।

इसी तरह, यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख जोसेप बोरेल ने भी इस संघर्ष को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की और मानवीय आधार पर अस्थायी युद्धविराम की वकालत की, ताकि प्रभावित इलाकों में मदद पहुंच सके।


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