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प्रयागराज: विकास के वादों के बीच जलभराव और बदहाल स्मार्ट सिटी का सच


🌊 प्रस्तावना

गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम की धरती प्रयागराज, जिसे स्मार्ट सिटी मिशन के तहत आधुनिक और सुसज्जित बनाने का दावा किया गया था, आज जलभराव और अव्यवस्था के संकट से जूझ रही है। करीब 20 हज़ार करोड़ रुपये के निवेश के बाद भी शहर का हाल ऐसा है कि हल्की बारिश में ही सड़कें तालाब बन जाती हैं और नालियाँ उफान मारने लगती हैं।

🏗️ स्मार्ट सिटी का सपना और धरातल की हकीकत

स्मार्ट सिटी योजना के तहत प्रयागराज को उन्नत परिवहन, बेहतर जल निकासी, स्वच्छ वातावरण और डिजिटल सुविधाओं से लैस करना लक्ष्य था। मगर जमीनी तस्वीर बिल्कुल उलट है—मुख्य मार्गों पर पानी भरना, नालियों की समय पर सफाई न होना, और बुनियादी ढांचे का बार-बार ध्वस्त होना प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है। यहाँ तक कि कुछ पुलिस थाने भी पानी में डूब गए, जिससे व्यवस्था का हाल स्पष्ट दिखता है।

💬 राजनीतिक बयानबाज़ी और जन आक्रोश

विपक्षी दलों ने इस स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अगर महाकुंभ जैसे आयोजनों के लिए रखे गए बजट का एक हिस्सा भी जल निकासी प्रणाली को सुधारने में लगाया जाता, तो शहर इस दुर्दशा से बच सकता था। उन्होंने इसे “भ्रष्टाचार की बाढ़” करार दिया, जो जनता की रोज़मर्रा की जिंदगी में घुसपैठ कर चुकी है।

🚨 आम नागरिकों की परेशानी

लगातार पानी भरने से लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। स्कूलों में छुट्टियां, ट्रैफिक जाम, बाजारों में ठप कारोबार, और गंदे पानी से फैलती बीमारियों का खतरा—ये सब मिलकर नागरिक जीवन को अस्त-व्यस्त कर रहे हैं। बारिश का हर दौर अब लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि चिंता लेकर आता है।

🔍 ज़िम्मेदारी तय करने का समय

यह संकट साफ संकेत देता है कि केवल परियोजनाओं की घोषणा और बजट आवंटन से विकास नहीं होता। जब तक प्रशासनिक तंत्र पारदर्शी नहीं होगा, योजनाओं का निष्पादन ईमानदारी से नहीं होगा और भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगेगा, तब तक स्मार्ट सिटी जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं सिर्फ़ कागज़ों में ही चमकती रहेंगी।


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