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एथेनॉल मिश्रण योजना पर ISMA का समर्थन, भ्रामक अफवाहों को बताया निराधार


नई दिल्ली, 9 अगस्त (एएनआई) — देश में एथेनॉल मिश्रण नीति को लेकर उठाए जा रहे संदेहों के बीच, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने इस कार्यक्रम का मजबूती से पक्ष लिया है और सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों पर फैलाए जा रहे “गलत तथ्यों” को सिरे से खारिज कर दिया है।

संघ के मुताबिक, E20 ईंधन — जिसमें 20% एथेनॉल सम्मिलित होता है — ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) द्वारा विस्तृत और कठोर परीक्षण से गुजर चुका है। इसे ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने भारतीय वाहनों के लिए पूरी तरह उपयुक्त और सुरक्षित घोषित किया है।

ISMA ने यह भी रेखांकित किया कि देश के अग्रणी ऑटोमोबाइल निर्माता पहले से ही E20-अनुरूप वाहन तैयार कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उद्योग इस नीति को लेकर आश्वस्त है।

उदाहरण के तौर पर, ISMA ने ब्राजील का हवाला दिया, जहां कई वर्षों से E20 से E100 तक के विभिन्न एथेनॉल मिश्रण सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो रहे हैं। वर्तमान में वहां पेट्रोल में 27% से अधिक एथेनॉल मिलाया जा रहा है और 2030 तक इसे 30% तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

संघ के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा, “एथेनॉल मिश्रण केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता है। कठोर वैज्ञानिक परीक्षण और दशकों के अनुभव के आधार पर यह किसानों, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण—तीनों के लिए लाभकारी साबित हुआ है।”

आर्थिक दृष्टि से, इस कार्यक्रम ने 5 करोड़ से अधिक गन्ना उत्पादकों के लिए क्रांतिकारी बदलाव लाया है। अब तक किसानों को 1.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। एथेनॉल सम्मिश्रण से न केवल चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि समय पर भुगतान और चीनी भंडारण के बेहतर प्रबंधन में भी मदद मिली है, जिससे गन्ने के दाम स्थिर रखने में सफलता मिली है।

ISMA के अनुसार, E20 लक्ष्य हासिल होने से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी और हर वर्ष 35,000 से 40,000 करोड़ रुपये तक की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकेगी।

बल्लानी ने सोशल मीडिया पर एथेनॉल मिश्रण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों को “तथ्यहीन” बताते हुए कहा कि यह देश के लिए दीर्घकालिक रूप से फायदेमंद योजना है और इसके खिलाफ भ्रम फैलाना राष्ट्रीय हित के विपरीत है।

हाल ही में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी जनता को आश्वस्त किया था कि इस नीति का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है।


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