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अफ़गानिस्तान: चार महीनों में सुप्रीम कोर्ट ने 340 विवेकाधीन सजाओं को दिया अंजाम


काबुल, 10 अगस्त 2025 – अफ़गानिस्तान के इस्लामिक अमीरात के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले चार महीनों में 27 प्रांतों, जिनमें राजधानी काबुल भी शामिल है, में अलग-अलग अपराधों के मामलों में 340 विवेकाधीन सजाएं सुनाई और लागू की हैं। यह जानकारी अदालत के प्रवक्ता अब्दुल रहीम राशिद ने दी।

राशिद के अनुसार, “विभिन्न अपराधों के आधार पर कुल 340 दोषियों को विवेकाधीन दंड दिया गया है।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विदेशी देशों की आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि अदालत के सभी फैसले इस्लामिक शरीयत और हुदूद कानूनों के तहत होते हैं, और विदेशी हस्तक्षेप या आलोचना का कोई महत्व नहीं है।

राशिद ने स्पष्ट किया, “सुप्रीम कोर्ट का रुख बिल्कुल साफ़ है—इस्लामिक आदेशों के तहत अपराधियों को सज़ा दी जाती है, और सभी निर्णय शरीयत के अनुसार ही लिए जाते हैं। किसी भी विदेशी संस्था या देश की राय हमारे लिए महत्वपूर्ण नहीं है।”

अफ़गानिस्तान नेशनल लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मीर अब्दुल वहीद सादात ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अदालत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अपराधियों के पुनर्वास, बचाव वकीलों तक पहुँच और अन्य मौलिक अधिकारों का पालन हो। सादात ने पूछा, “ये सजाएं किस लागू कानून के तहत दी जा रही हैं?”

वहीं धार्मिक विद्वान हसीबुल्लाह हनफ़ी ने अदालत के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “अगर देश में शरीयत को पूरी तरह लागू करना है, तो हुदूद और विवेकाधीन सजाओं पर विशेष ध्यान देना होगा। अगर हम भ्रष्टाचार, राजद्रोह, हत्या और लूटपाट को समाप्त करना चाहते हैं, तो शरीयत द्वारा निर्धारित सिद्धांतों और सीमाओं का पालन आवश्यक है।”

सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह शरीयत के फैसलों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे नहीं झुकेगा और वैश्विक समुदाय से अपील की है कि अफ़गानिस्तान में शरीयत दंडों के प्रवर्तन पर नकारात्मक प्रचार से बचा जाए।


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