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भारत में आपदा प्रबंधन का नया स्वरूप: तकनीक, जागरूकता और तैयारी पर जोर


नई दिल्ली, 10 अगस्त 2025 — भारत का आपदा प्रबंधन तंत्र लगातार आधुनिक और प्रभावी होता जा रहा है। अब इस दिशा में ज़ोर केवल आपदा आने के बाद राहत कार्यों पर ही नहीं, बल्कि उससे पहले तैयारी, रोकथाम और त्वरित प्रतिक्रिया पर भी दिया जा रहा है।

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, देश में अब आपदा प्रबंधन के तहत प्रि-एम्प्टिव यानी पहले से तैयारी करने वाले उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसमें अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग, मॉक ड्रिल (अभ्यास सत्र) और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को प्रशिक्षित करना शामिल है।

नागरिक और संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी
सरकार का मानना है कि सतर्क नागरिक और उत्तरदायी संस्थाएं, किसी भी आपदा से निपटने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देती हैं। यही कारण है कि इन ड्रिल्स में आम जनता, स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा बल और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को मिलकर शामिल किया जाता है।

समन्वय और सिमुलेशन से बनेगी मज़बूत तैयारी
“इंटीग्रेटेड डिज़ास्टर प्रिपेयर्डनेस ड्रिल” जैसे अभ्यासों में विभिन्न आपदा परिदृश्यों का सिमुलेशन किया जाता है, ताकि वास्तविक स्थिति में बेहतर और तेज़ प्रतिक्रिया दी जा सके। इन अभ्यासों से विभागों के बीच तालमेल बढ़ता है और संसाधनों के कुशल उपयोग की रणनीति बनती है।

भारत का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में वह एक डिज़ास्टर-रेज़िलिएंट नेशन बने—यानि ऐसा देश जो किसी भी प्राकृतिक या मानव-जनित आपदा से शीघ्र उबर सके और न्यूनतम नुकसान झेले।


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