
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई है। मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया है कि वोटों की खुलेआम लूट हुई। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीधे चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने में नाकाम रहा और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल भाजपा के पक्ष में किया गया।
अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह कोई नया मामला नहीं है, बल्कि पहले भी समाजवादी पार्टी कई बार चुनावी गड़बड़ियों की शिकायत कर चुकी है। इस उपचुनाव में तो पुलिस बल के रवैये से साफ था कि वे भाजपा के लिए वोट दिलवाने में जुटे थे। मिल्कीपुर में तो सीधे-सीधे वोट छीने गए।”
उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया और कहा, “हमें कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के आने पर राहत है। अगर यूपी में हमारी सरकार होती तो हमने चुनाव आयोग के भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए होते। हमें उम्मीद है कि कांग्रेस भी ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी।”
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग पहले से ही कई संवेदनशील मामलों को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहा है। हरियाणा और कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारियों के पत्र, और राहुल गांधी को भेजे गए नोटिस के बाद आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि राहुल गांधी को अपने ‘वोट चोरी’ वाले बयान पर या तो ठोस सबूत देने होंगे या फिर सार्वजनिक माफी मांगनी होगी।
कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी ने 10 अगस्त को राहुल गांधी को एक पत्र भेजकर 7 अगस्त की उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि एक महिला मतदाता, शकुन रानी, ने दो बार मतदान किया। हालांकि, बाद में शकुन रानी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता ही जनता के भरोसे की बुनियाद है। मिल्कीपुर उपचुनाव और राहुल गांधी से जुड़ा मामला इस बात को रेखांकित करता है कि चुनाव आयोग के सामने जनता का विश्वास बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि आयोग इन गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाता है और क्या इन घटनाओं के बाद देश की चुनावी प्रणाली में कोई सकारात्मक सुधार देखने को मिलता है।