भूमिका
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनियन से बातचीत के बाद हाल ही में हुए अर्मेनिया-अज़रबैजान समझौते का स्वागत किया है। यह वार्ता 8 अगस्त को वॉशिंगटन में आयोजित बैठक के बाद हुई, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाना है।
समझौते का महत्व
मैक्रों ने इस समझौते को अमेरिका के प्रयासों का परिणाम बताया और उम्मीद जताई कि यह जल्द ही एक शांति संधि में तब्दील होगा, जिसे दोनों पक्ष हस्ताक्षर और अनुमोदित करेंगे। उनका कहना है कि यह संधि दोनों देशों के हितों का सम्मान करेगी और स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी।
फ्रांस की प्रतिबद्धता
राष्ट्रपति मैक्रों ने अर्मेनिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराया। उन्होंने दक्षिण काकेशस क्षेत्र में शांति और समृद्धि के लिए फ्रांस की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट किया। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि फ्रांस क्षेत्रीय भागीदारों के साथ मिलकर आपसी संपर्क और सहयोग को मजबूत करने के लिए तैयार है।
द्विपक्षीय संबंधों में प्रगाढ़ता
बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने यह सहमति भी जताई कि फ्रांस और अर्मेनिया अपने द्विपक्षीय संबंधों को सभी क्षेत्रों में और गहरा करेंगे। यह प्रयास 14 जुलाई को प्रधानमंत्री पशिनियन की पेरिस यात्रा के दौरान हुई सकारात्मक चर्चाओं पर आधारित होगा।
निष्कर्ष
अर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को समाप्त करने में यह समझौता अहम साबित हो सकता है। फ्रांस की सक्रिय भूमिका और दोनों देशों के बीच बढ़ता संवाद दक्षिण काकेशस में स्थायी शांति की उम्मीद को और मजबूत करता है।
