
नई दिल्ली, 12 अगस्त — उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को असम पुलिस को आदेश दिया कि वह ‘द वायर’ के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ दर्ज एफआईआर में फिलहाल कोई दंडात्मक कदम न उठाए। यह मामला ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी एक खबर के प्रकाशन से संबंधित है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र और असम सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। यह धारा पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) के राजद्रोह प्रावधान का स्थान लेती है।
पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता फाउंडेशन से जुड़े वे सदस्य जिन पर प्राथमिकी दर्ज हुई है, वे आवश्यकतानुसार जांच में सहयोग करें। लेकिन, उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।”
यह याचिका फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म ने दायर की, जो ‘द वायर’ पोर्टल का संचालन करता है। इसमें दावा किया गया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर प्रकाशित लेख केवल इंडोनेशिया के एक विश्वविद्यालय में आयोजित सेमिनार में दिए गए तथ्यों और वक्तव्यों पर आधारित था, जिसमें भारत के रक्षा अटैची और सैन्य कर्मियों द्वारा अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना को हुए नुकसान और अपनाई गई रणनीतियों का उल्लेख था।
एफआईआर में आरोप है कि यह लेख भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा उत्पन्न करता है। यह रिपोर्ट 29 जून को शीर्षक “IAF Lost Fighter Jets to Pak Because of Political Leadership’s Constraints’: Indian Defence Attache” के साथ प्रकाशित हुई थी।
याचिका में यह भी कहा गया कि शिकायतकर्ता असम के सत्ताधारी दल से जुड़ा एक पदाधिकारी है, और यह मामला पत्रकारों को निशाना बनाने के उद्देश्य से दर्ज कराया गया है।