
उत्तर प्रदेश की सियासत में फतेहपुर की हालिया घटना ने हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले पर भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सांप्रदायिक राजनीति देश की जड़ों को कमजोर कर रही है और इसका खामियाज़ा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
🔥 अखिलेश यादव का तंज
घटना के बाद अखिलेश यादव ने कहा,
“सांप्रदायिक राजनीति देश के लिए घातक है। बीजेपी से पूछना चाहिए कि 2014 में भारत का क्षेत्रफल क्या था और 2025 में कितना है?”
उनका यह बयान न केवल भाजपा की नीतियों पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि देश की अखंडता और भविष्य की दिशा पर भी चिंता व्यक्त करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को युवाओं को रोज़गार देने और आर्थिक विकास पर ध्यान देना चाहिए, न कि समाज में धार्मिक विभाजन पैदा करने पर।
🏛️ सदन में हंगामे का माहौल
फतेहपुर घटना को लेकर विधानसभा का माहौल भी गर्म हो गया। सपा विधायकों ने विरोध जताते हुए कार्यवाही में व्यवधान डाला। इसके जवाब में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे केवल राजनीतिक लाभ के लिए माहौल बिगाड़ रहे हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि घटना में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, आरोपी की पहचान कर ली गई है और कठोर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। बावजूद इसके, विपक्ष ने सदन में वाद-विवाद को जारी रखा और सरकार पर नाकामी के आरोप लगाए।
🧭 राजनीति का बदलता स्वरूप
इस पूरे मामले ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या वर्तमान राजनीति जनहित के मुद्दों से हटकर धार्मिक ध्रुवीकरण की ओर बढ़ रही है? अखिलेश यादव की टिप्पणी संकेत देती है कि यदि रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दे राजनीतिक एजेंडे से बाहर होते गए, तो इसका सीधा असर देश की सामाजिक एकता और स्थिरता पर पड़ेगा।
📌 निष्कर्ष
फतेहपुर की यह घटना केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीति की दिशा और प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाती है। अखिलेश यादव का रुख इस बात पर जोर देता है कि लोकतंत्र में असली ताकत जनता की भलाई में है, न कि सांप्रदायिक विभाजन में। यह समय है जब सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर विकास और एकता की राह पर काम करना चाहिए।