HIT AND HOT NEWS

बिहार मतदाता सूची पर विशेष पुनरीक्षण: 17,665 आपत्तियां दर्ज, 454 मामलों का निपटारा, राजनीतिक दलों की चुप्पी


नई दिल्ली, 13 अगस्त (एएनआई) – भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मसौदा मतदाता सूची पर कुल 17,665 दावे और आपत्तियां दर्ज हुई हैं, जिनमें से अब तक 454 मामलों का निपटारा कर दिया गया है।

आयोग के अनुसार, 13 दिन बीत जाने के बावजूद किसी भी राजनीतिक दल ने न तो दावा प्रस्तुत किया है और न ही कोई आपत्ति दर्ज कराई है। वहीं, 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाताओं से अब तक 74,525 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 6 फॉर्म बीएलएएस (बूथ लेवल अवेयरनेस ग्रुप) के माध्यम से आए हैं।

निर्धारित नियमों के तहत, पात्रता दस्तावेजों की जांच पूरी होने के सात दिन बाद संबंधित ईआरओ/एईआरओ द्वारा प्राप्त दावों और आपत्तियों पर निर्णय लिया जाता है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 1 अगस्त 2025 को जारी मसौदा सूची से किसी भी नाम को बिना सुनवाई और उचित अवसर दिए हटाया नहीं जा सकता।

उल्लेखनीय है कि SIR प्रक्रिया के तहत 1 अगस्त को बिहार की मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित हुई थी और दावों व आपत्तियों के निपटारे के बाद एक माह के भीतर अंतिम सूची जारी की जाएगी।

इससे पहले, मंगलवार को आयोग को कुल 13,970 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 341 का समाधान किया गया था। उस समय नए मतदाताओं से 63,591 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें 6 फॉर्म बीएलएएस के माध्यम से आए थे।

इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बिहार की चुनावी सूची में SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई की। न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि आधार कार्ड नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है, और गैर-नागरिकों का नाम शामिल या बाहर करना चुनावी नियमों के अंतर्गत आता है।

सुनवाई के दौरान राजद सांसद मनोज कुमार झा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि मसौदा मतदाता सूची से लाखों नाम बिना किसी आपत्ति प्रक्रिया के हटाना कानून के विपरीत है।


Exit mobile version