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पाकिस्तान को आपदा प्रबंधन में तेजी से सुधार की दरकार: संयुक्त राष्ट्र


इस्लामाबाद — संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान को आगामी मानसून से पहले अपनी आपदा प्रबंधन क्षमताओं में तत्काल सुधार करना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (UNOCHA) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, देश को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए योजनाबद्ध और प्रभावी कदम उठाने की ज़रूरत है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन और भौगोलिक स्थिति, दोनों ही उसे आपदा-प्रवण बना रहे हैं।

पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग (PMD) ने अनुमान जताया है कि आने वाले दिनों में विभिन्न प्रांतों में भारी वर्षा हो सकती है। इससे निचले इलाकों में बाढ़, पहाड़ी क्षेत्रों में तेज़ बाढ़ (फ़्लैश फ्लड) और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाएगा। ख़ासकर पाकिस्तान-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान और अन्य कमजोर क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान का स्थान भूकंप-संवेदनशील टेक्टोनिक प्लेटों के करीब है। जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, सूखा और चरम मौसम की घटनाएँ अब अधिक बार और गंभीर रूप में सामने आ रही हैं। राजनीतिक अस्थिरता, सुरक्षा चुनौतियाँ और सीमावर्ती तनाव भी आपदा प्रबंधन को कठिन बना रहे हैं।

UNOCHA ने ज़ोर दिया है कि पाकिस्तान को आपदा जोखिम में कमी लाने, समय पर चेतावनी प्रणाली को मज़बूत करने और समुदायों की लचीलापन क्षमता बढ़ाने में निवेश करना चाहिए। इसके साथ ही, दीर्घकालिक विकास योजनाओं और संसाधन प्रबंधन में सुधार करना भी अनिवार्य है।

2022 की विनाशकारी बाढ़ का ज़िक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि उस आपदा ने 3 करोड़ से अधिक लोगों को प्रभावित किया था और देश की अर्थव्यवस्था को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 6% के बराबर नुकसान पहुँचा था।

इसके अलावा, समुद्र स्तर में वृद्धि, अनियमित वर्षा और कृषि चक्र में बदलाव के कारण जल संकट, सूखा और खाद्य असुरक्षा जैसी चुनौतियाँ भी बढ़ रही हैं। शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में ये प्रभाव सबसे ज़्यादा महसूस किए जा रहे हैं।

PMD के अनुसार, 14 से 22 अगस्त के बीच मानसूनी बारिश का दौर जारी रहेगा, जिससे शहरी क्षेत्रों में जलभराव और पहाड़ी इलाकों में तेज़ बाढ़ का खतरा बना रहेगा।


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