
नई दिल्ली, 13 अगस्त (एएनआई) — सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और बिल्डरों के बीच कथित सांठगांठ की जांच को नया मोड़ देते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस की एक नई विशेष जांच टीम (SIT) बनाने का आदेश दिया है। यह टीम भूमि अधिग्रहण मुआवजे में हुई अनियमितताओं और मिलीभगत के आरोपों की प्रारंभिक जांच करेगी।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्देश दिया कि यह नई SIT तीन आईपीएस अधिकारियों से मिलकर बनेगी और पूर्व की जांच टीम की जगह लेगी। साथ ही, अदालत ने बिना पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) के नोएडा में चल रही परियोजनाओं के विकास पर भी तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया।
अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) ऐसी SIT का गठन करें, जो पूर्ववर्ती टीम द्वारा उठाए गए बिंदुओं की गहराई से पड़ताल करेगी। जांच में फोरेंसिक विशेषज्ञों और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की भी मदद ली जाएगी। यदि शुरुआती जांच के बाद कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है, तो FIR दर्ज कर आगे की कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि SIT की रिपोर्ट की एक प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजी जाए, जिसे मंत्रिपरिषद के समक्ष रखकर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा, मुख्य सचिव को नोएडा में एक मुख्य सतर्कता अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं, जो या तो आईपीएस रैंक के हों या फिर कैग (CAG) से प्रतिनियुक्ति पर आए हों।
यह आदेश उस समय आया है जब आठ सप्ताह बाद मामले की सुनवाई पुनः शुरू हुई। यह वही मामला है जिसमें अदालत ने पहले भूमि मालिकों को अनुचित रूप से अधिक मुआवजा देने के आरोपों के चलते SIT जांच का आदेश दिया था, जबकि वे इसके पात्र नहीं थे।