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पहला अंतर्राष्ट्रीय सौर महोत्सव: सूर्य ऊर्जा के प्रति वैश्विक जागरूकता का उत्सव

भारत में आयोजित होने वाला पहला अंतर्राष्ट्रीय सौर महोत्सव, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग और विकास का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह महोत्सव न केवल पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा स्रोतों के सतत् उपयोग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया है, बल्कि इसके जरिए दुनिया भर के देशों के बीच एकजुटता का भी संदेश दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महोत्सव का शुभारंभ करते हुए इसे भविष्य के लिए एक सकारात्मक पहल बताया और इसके महत्व पर बल दिया।

सौर ऊर्जा और भारतीय संस्कृति का गहरा संबंध

प्रधानमंत्री ने अपने उद्घाटन भाषण में भारतीय संस्कृति में सूर्य के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हजारों साल पहले रचित वेदों में सूर्य की महिमा का उल्लेख मिलता है, और आज भी करोड़ों भारतीय सूर्य के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए प्रतिदिन मंत्रोच्चार करते हैं। भारतीय संस्कृति के अलावा, दुनिया की कई संस्कृतियों में भी सूर्य को सम्मान देने की परंपरा रही है। यह अंतर्राष्ट्रीय सौर महोत्सव सूर्य के प्रति इस वैश्विक सम्मान को एक मंच पर लेकर आता है, जिससे दुनिया भर में सौर ऊर्जा के महत्व को समझने की प्रेरणा मिलेगी।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की अद्वितीय पहल

2015 में जब अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की शुरुआत हुई थी, तब यह एक छोटी सी पहल के रूप में सामने आया था, लेकिन अब यह एक विशाल संगठन के रूप में विकसित हो गया है। आज ISA के सदस्य देशों की संख्या 100 से अधिक हो गई है, और 19 और देश इसे पूर्ण सदस्यता के लिए रत्नित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने ‘One World, One Sun, One Grid’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में इस गठबंधन की भूमिका की सराहना की। यह पहल वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता और सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

भारत का सौर ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी स्थान

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत द्वारा पिछले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। भारत, पहला G20 देश है जिसने पेरिस जलवायु समझौते के तहत नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्यों को समय से पहले पूरा किया। पिछले 10 वर्षों में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में 32 गुना वृद्धि हुई है, और 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। यह तेजी से विकास भारत के सतत् और हरित भविष्य के प्रति संकल्प को दर्शाता है।

सौर ऊर्जा के प्रति भारत की स्पष्ट नीति

भारत की सौर ऊर्जा में सफलता का कारण उसकी स्पष्ट नीति है। प्रधानमंत्री ने तीन प्रमुख पहलुओं – जागरूकता, उपलब्धता और वहनीयता – को सौर ऊर्जा के बढ़ते अपनाने के लिए महत्वपूर्ण बताया। जागरूकता के लिए सरकार ने कई योजनाओं की शुरुआत की है, जबकि घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करके सौर ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाई गई है। इसके अलावा, विभिन्न योजनाओं और प्रोत्साहनों के जरिए सौर ऊर्जा को किफायती भी बनाया गया है।

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: एक प्रेरणादायक पहल

प्रधानमंत्री ने ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ का उदाहरण दिया, जिसके तहत भारत सरकार 750 अरब रुपये का निवेश कर रही है। इस योजना के माध्यम से 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। इसके तहत, घरों में न केवल स्वच्छ बिजली उत्पन्न की जा रही है, बल्कि अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर लोग आय भी अर्जित कर सकते हैं। यह योजना सौर ऊर्जा को सस्ता और आकर्षक विकल्प बना रही है और इसे तेजी से लोकप्रिय बना रही है।

ISA की वैश्विक भूमिका

ISA ने अपने छोटे से समय में ही 44 देशों में 10 गीगावॉट बिजली उत्पन्न करने में सहायता की है। इसके साथ ही, यह संगठन सोलर पंपों की वैश्विक कीमतों को कम करने में भी भूमिका निभा रहा है। विशेष रूप से अफ्रीकी सदस्य देशों में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ISA के माध्यम से एशिया-प्रशांत और भारत में भी कई सौर स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जा रहा है, और यह पहल जल्द ही लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों तक विस्तारित की जाएगी।

ऊर्जा संक्रमण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सौर ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए हमें वैश्विक स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने की जरूरत है। हरे ऊर्जा निवेश की असमानता को दूर करना, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण को लोकतांत्रिक बनाना और विकासशील देशों की मदद करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। विशेष रूप से छोटे द्वीप विकासशील राज्यों और सबसे कम विकसित देशों को सशक्त बनाना आवश्यक है। इस महोत्सव के माध्यम से ऐसे मुद्दों पर चर्चा और समाधान निकालने का अवसर मिलेगा।

भारत का हरित भविष्य के प्रति संकल्प

प्रधानमंत्री ने इस महोत्सव के अवसर पर दोहराया कि भारत हरित भविष्य के लिए दुनिया के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले साल G20 में, भारत ने ‘ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस’ की स्थापना की थी और ISA का एक संस्थापक सदस्य भी है। हरित और समावेशी ग्रह के निर्माण के हर प्रयास में भारत का पूरा समर्थन रहेगा।

अंतर्राष्ट्रीय सौर महोत्सव दुनिया भर को एक मंच पर लाकर ऊर्जा संक्रमण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह महोत्सव न केवल सौर ऊर्जा के लाभों को उजागर करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने के लिए एक प्रेरक शक्ति के रूप में कार्य करेगा।

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