
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट @MamataOfficial पर कन्याश्री दिवस की शुभकामनाएं देते हुए एक विशेष संदेश साझा किया। उन्होंने कन्याश्री योजना की 12वीं वर्षगांठ पर इसे महिलाओं के सशक्तिकरण का एक मजबूत माध्यम बताया और इस बात पर गर्व जताया कि इस योजना को संयुक्त राष्ट्र पब्लिक सर्विस अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
कन्याश्री योजना – एक परिवर्तनकारी पहल
साल 2013 में ममता बनर्जी द्वारा शुरू की गई कन्याश्री योजना पश्चिम बंगाल की बेटियों के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हुई। इसका उद्देश्य बाल विवाह की रोकथाम, लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
इस योजना के तहत—
- 13 से 18 वर्ष की छात्राओं को प्रति वर्ष 1,000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है।
- 18 वर्ष की आयु तक अविवाहित रहने पर 25,000 रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
ममता बनर्जी के अनुसार, अब तक 80 लाख से अधिक लड़कियां इस योजना का लाभ उठा चुकी हैं और राज्य सरकार ने 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके हाथों में सौंपी है। यह न केवल शिक्षा की ओर प्रेरित करता है, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का मार्ग भी खोलता है।
सामाजिक बदलाव की दिशा में कदम
कन्याश्री योजना का असर सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने समाज की सोच में भी बदलाव लाया है। पश्चिम बंगाल में बाल विवाह की दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है और लड़कियां अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए अधिक उत्साहित हुई हैं। इससे उनमें यह विश्वास जगा है कि वे समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
ममता बनर्जी का यह कहना—
“हम महिला सशक्तिकरण की बात सिर्फ भाषणों में नहीं करते, बल्कि उसे धरातल पर उतारते हैं।”
इस योजना की वास्तविक सफलता को स्पष्ट करता है।
कन्याश्री दिवस – प्रेरणा और गर्व का प्रतीक
हर साल 14 अगस्त को मनाया जाने वाला कन्याश्री दिवस बेटियों को यह याद दिलाता है कि वे राज्य और देश का भविष्य हैं और अपने सपनों को साकार करने का उन्हें पूरा अधिकार है।
अपने संदेश में ममता बनर्जी ने कन्याश्री लाभार्थी छात्राओं से आह्वान किया—
“तुम जीवन में ऊँचाइयों को छुओ, देश और राज्य का नाम रोशन करो। तुम ही आने वाले समय में विश्व बंगाल का निर्माण करोगी।”
अंत में, उन्होंने “जय हिंद! जय बांग्ला! जय कन्याश्री!” के नारों के साथ इस विशेष दिवस का महत्व और भी गहरा कर दिया, जो बेटियों के आत्मविश्वास और सपनों को पंख देने का प्रतीक है।