
भारत अब केवल तकनीकी उत्पादों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उन्हें स्वयं विकसित और निर्यात करने वाला देश बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया “भारत सेमीकंडक्टर मिशन” (India Semiconductor Mission – ISM) इस यात्रा का अहम पड़ाव है। इस कार्यक्रम के तहत 10 उन्नत परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जो चिप निर्माण से लेकर डिज़ाइन, पैकेजिंग और परीक्षण तक एक पूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने में सहायक होंगी।
🎯 मिशन के प्रमुख उद्देश्य
भारत सेमीकंडक्टर मिशन की रूपरेखा में ये मुख्य पहलू शामिल हैं—
- विश्वस्तरीय चिप निर्माण संयंत्रों की स्थापना।
- अत्याधुनिक डिज़ाइन और अनुसंधान केंद्रों का विकास।
- उच्च क्षमता वाले ATMP (Assembly, Testing, Marking, Packaging) हब का निर्माण।
- विशेषज्ञ इंजीनियर और तकनीशियन तैयार करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम।
इन प्रयासों से भारत न केवल आयात पर निर्भरता घटाएगा, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक मज़बूत स्थान बनाएगा।
🏭 10 परियोजनाओं का महत्व
ये परियोजनाएं देश के विभिन्न राज्यों में स्थापित की जाएंगी, जिनका मुख्य उद्देश्य होगा—
- उच्च तकनीक वाले चिप फैब्रिकेशन प्लांट तैयार करना।
- नवाचार-उन्मुख डिज़ाइन प्रयोगशालाओं का विकास।
- उन्नत पैकेजिंग और परीक्षण इकाइयों का निर्माण।
संभावित लाभ:
- घरेलू चिप उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि।
- विदेशी आयात पर खर्च में कमी।
- ऑटोमोबाइल, रक्षा, दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और AI उद्योगों को सतत आपूर्ति।
🌏 वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत
वर्तमान में पूरी दुनिया चिप की कमी से जूझ रही है। ऐसे समय में यह मिशन—
- भारत को आत्मनिर्भर चिप उत्पादक बनाएगा।
- निर्यात बढ़ाकर विदेशी मुद्रा अर्जन में मदद करेगा।
🚀 भविष्य की दिशा
इस योजना से आने वाले वर्षों में लाखों रोजगार सृजित होंगे। साथ ही, भारत को एक वैश्विक डिजिटल विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। यह कदम केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर नहीं, बल्कि नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था की मज़बूत नींव की ओर भी इशारा करता है।