
नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की पाँचवीं वर्षगांठ के अवसर पर, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत समावेशी शिक्षा खंड के तहत देशभर में एक विशेष अभियान चलाया।
यह राष्ट्रव्यापी पहल 29 जुलाई 2025 से आरंभ होकर एक सप्ताह तक चली, जिसमें जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs – CwSN) के लिए मेगा मूल्यांकन एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित किए गए। इसका मूल उद्देश्य इन बच्चों को शिक्षा में समान अवसर उपलब्ध कराना और उनकी क्षमताओं को निखारने में सहायता देना था।
🎯 अभियान के मुख्य उद्देश्य
- सहायक उपकरण वितरण: दृष्टिहीनता, श्रवण संबंधी कठिनाई, गतिशीलता में बाधा या अन्य विशेष चुनौतियों वाले बच्चों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप उपकरण प्रदान करना।
- स्वास्थ्य एवं क्षमता मूल्यांकन: विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बच्चों का परीक्षण कर उनकी शैक्षिक एवं व्यक्तिगत जरूरतों की पहचान करना।
- अधिकार एवं योजनाओं की जानकारी: बच्चों और उनके अभिभावकों को सरकारी सुविधाओं, कानूनी अधिकारों और समावेशी शिक्षा नीतियों से अवगत कराना।
🌍 शिक्षा में समानता की दिशा में एक सार्थक कदम
यह अभियान केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी है। शिक्षा मंत्रालय ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी बच्चे को उसकी शारीरिक या मानसिक चुनौतियों के कारण शिक्षा से वंचित न होना पड़े।
यह पहल एनईपी 2020 की उस मूल भावना का प्रत्यक्ष उदाहरण है जिसमें “समानता और समावेशिता” को शिक्षा व्यवस्था का आधार स्तंभ माना गया है।
📊 जनसहभागिता और प्रतिक्रिया
अभियान से जुड़ी तस्वीरें और जानकारी शिक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ट्विटर (@EduMinOfIndia) पर साझा कीं, जिन्हें व्यापक सराहना मिली। एक नागरिक, श्रीनिवास राव ने “हरिहि ओम 🌸🌸🌸” लिखकर इस प्रयास की प्रशंसा की, जिससे स्पष्ट होता है कि यह पहल केवल सूचनात्मक नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव भी स्थापित कर रही है।
🔍 भविष्य की दिशा
ऐसे शिविरों को नियमित रूप से आयोजित कर, और अधिक स्थानीय समन्वय स्थापित किया जा सकता है। साथ ही,
- शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देना,
- स्कूलों में सहायक संसाधन उपलब्ध कराना,
- तथा अभिभावकों को समय-समय पर मार्गदर्शन प्रदान करना
समावेशी शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को और मजबूत करेगा।
📚 निष्कर्ष
समावेशी शिक्षा कोई मात्र सरकारी योजना नहीं, बल्कि यह संवेदनशील दृष्टिकोण है जो प्रत्येक बच्चे को गरिमा के साथ सीखने का अवसर प्रदान करता है। शिक्षा मंत्रालय की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार, समाज और शिक्षा जगत एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तो एक समान, सशक्त और समावेशी भारत का निर्माण संभव है।