
पिछले एक दशक से अधिक समय में भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र में जो बदलाव किए हैं, वे सिर्फ योजनाओं या आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि किसानों के जीवन और सम्मान में वास्तविक सुधार के प्रमाण हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की हालिया पोस्ट में यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि “कर्ज से गरिमा तक” की यात्रा, किसानों के आत्मनिर्भर और सशक्त भविष्य की कहानी है।
🌾 न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में ऐतिहासिक सुधार
- MSP निर्धारण को पारदर्शी और लाभकारी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
- लागत पर आधारित लाभकारी मूल्य तय करने से किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलना सुनिश्चित हुआ।
- खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए समय पर MSP घोषणा से बुवाई और फसल कटाई की बेहतर योजना बन पाई।
💰 आर्थिक सहयोग और वित्तीय पहुंच
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के अंतर्गत हर पात्र किसान को सालाना ₹6,000 की सीधी सहायता दी जा रही है।
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना का दायरा बढ़ाकर छोटे और सीमांत किसानों तक भी आसान ऋण सुविधा पहुंचाई गई।
- डिजिटल भुगतान ने बिचौलियों की भूमिका घटाकर लेनदेन को पारदर्शी बनाया।
🚜 तकनीकी प्रगति और नवाचार
- ड्रोन, प्रिसिजन फार्मिंग और मोबाइल एप्स ने खेती को अधिक आधुनिक और स्मार्ट बनाया।
- कृषि विज्ञान केंद्रों और ई-नाम पोर्टल ने किसानों को वैज्ञानिक सुझाव और व्यापक बाजार उपलब्ध कराए।
- जलवायु परिवर्तन के अनुकूल खेती के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी संसाधन मुहैया कराए गए।
🛡️ सुरक्षा और स्थायित्व की दिशा
- फसल बीमा योजनाओं को सरल बनाकर अधिक किसानों तक पहुंचाया गया।
- प्राकृतिक आपदा या संकट की स्थिति में राहत राशि सीधे किसानों के खातों में स्थानांतरित की गई।
- जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर भविष्य के लिए टिकाऊ कृषि मॉडल तैयार किए जा रहे हैं।
📈 11 वर्षों की सेवा — किसान केंद्रित दृष्टिकोण
“11YearsOfSeva” महज़ एक नारा नहीं, बल्कि इस सोच का प्रतीक है कि किसान ही देश की रीढ़ हैं। यह यात्रा आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ सामाजिक सम्मान की भी है, जहाँ किसान अब केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि तकनीक और नवाचार के साझेदार भी बन चुके हैं।