
वियना स्थित तेल निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) ने हाल ही में इस बात पर ज़ोर दिया है कि वैश्विक स्तर पर क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) की सप्लाई चेन को बनाए रखने में तेल की अहम और अपरिहार्य भूमिका है। संगठन का कहना है कि खनन, प्रोसेसिंग और परिवहन जैसे क्षेत्रों में आज भी हाइड्रोकार्बन यानी तेल और गैस पर ही सबसे ज़्यादा निर्भरता बनी हुई है।
ओपेक के महासचिव हैथम अल ग़ैस ने अपने बयान में कहा—
“क्रिटिकल मिनरल्स का खनन बेहद ऊर्जा-गहन प्रक्रिया है, और वर्तमान में यह पूरी तरह हाइड्रोकार्बन पर आधारित है। इसके बिना यह काम संभव ही नहीं।”
खनिज और आधुनिक तकनीक
लिथियम, कोबाल्ट, निकल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे खनिज आज की दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा ढांचे, इलेक्ट्रिक वाहनों और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बेहद ज़रूरी हैं। इन खनिजों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन इन्हें निकालने और वैश्विक बाज़ार तक पहुँचाने के लिए अब भी तेल पर ही निर्भरता बनी हुई है।
तेल की भूमिका कहाँ-कहाँ?
- भारी खनन मशीनरी का संचालन – बड़े पैमाने पर खनिज निकालने वाली मशीनें डीज़ल और अन्य तेल-आधारित ईंधन पर चलती हैं।
- प्रोसेसिंग सुविधाएँ – खनिजों को शुद्ध करने और उपयोग योग्य बनाने वाली फैक्ट्रियों में ऊर्जा का अधिकांश हिस्सा तेल और गैस से मिलता है।
- लंबी दूरी का परिवहन – खनिजों को खदानों से बंदरगाहों और फिर अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचाने में जहाज़ और ट्रक मुख्य साधन हैं, जो तेल पर निर्भर हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा की विडंबना
दुनिया तेज़ी से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है, लेकिन इस बदलाव के लिए जिन खनिजों की आवश्यकता है, उनकी सप्लाई चेन अब भी तेल पर आधारित है। यह एक तरह का ऊर्जा विरोधाभास (Energy Paradox) है—जहाँ तेल को हटाए बिना हरित भविष्य का निर्माण कठिन साबित हो रहा है।
आगे की चुनौती
सवाल यह है कि खनन और प्रोसेसिंग उद्योग कितनी जल्दी वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर शिफ्ट हो सकते हैं? अगर यह बदलाव बहुत धीरे-धीरे होता है, तो महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई बाधित हो सकती है, जिससे वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं पर असर पड़ेगा।
निष्कर्ष
ओपेक का यह बयान साफ करता है कि तेल केवल पारंपरिक ऊर्जा स्रोत ही नहीं है, बल्कि आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे को चलाने वाला छुपा हुआ आधार (Hidden Backbone) भी है। जब तक खनन और सप्लाई चेन पूरी तरह वैकल्पिक ऊर्जा पर नहीं जाते, तब तक तेल का महत्व बना रहेगा।