
हर वर्ष दुनिया में लगभग 430 मिलियन टन प्लास्टिक का उत्पादन होता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करता है। चिंताजनक बात यह है कि हर मिनट 15 टन प्लास्टिक सीधे महासागरों में पहुंच रहा है। यह न केवल समुद्री पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल ही में इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्लास्टिक प्रदूषण केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं है, बल्कि यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल भी है। प्लास्टिक के सूक्ष्म कण (Microplastics) हमारी हवा, पानी और भोजन में घुस चुके हैं, जिससे कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तुत वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण संधि के मसौदे को मैक्रों ने “कमज़ोर” बताया और कहा कि इस समय आधे-अधूरे कदम उठाने का कोई मतलब नहीं है। उनका मानना है कि जब पूरी दुनिया जिनेवा में एकत्रित है, तो एक ऐसा समझौता होना चाहिए जो इस संकट के पैमाने के अनुरूप और ठोस हो।
उन्होंने सभी देशों से आग्रह किया कि वे अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएँ और ऐसी संधि को अपनाएँ जो आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को सुरक्षित बनाए। मैक्रों ने अपने देश के उन सभी वार्ताकारों की सराहना की जो इस लक्ष्य को पाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
निष्कर्ष
प्लास्टिक प्रदूषण की चुनौती वैश्विक है और इसका समाधान भी वैश्विक स्तर पर ही संभव है। अब समय आ गया है कि सभी देश मिलकर सख्त नीतियाँ और स्पष्ट लक्ष्य तय करें, ताकि हमारे महासागर, हमारा पर्यावरण और हमारे बच्चे सुरक्षित रह सकें।