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🇮🇳 भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर फ्रांस और रूस की शुभकामनाएँ: वैश्विक मंच पर नई ऊँचाइयाँ छूता भारत


15 अगस्त 2025 को भारत ने गर्व और उत्साह के साथ अपना 79वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाया। इस अवसर पर विश्व के कई प्रमुख नेताओं ने भारत को बधाई संदेश भेजे, जिनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के संदेश विशेष महत्व रखते हैं। दोनों नेताओं ने न केवल शुभकामनाएँ दीं, बल्कि भारत की उपलब्धियों और द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती पर भी जोर दिया।

🤝 भारत–फ्रांस संबंध: मैक्रों का स्नेहपूर्ण संदेश

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के माध्यम से भारतवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने लिखा कि भारत के साथ उनकी मुलाकातें और संवाद हमेशा खास रहे हैं, और फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ्रांस आगमन उनके लिए एक यादगार अनुभव था।
मैक्रों ने 2047 तक और उससे आगे भी भारत–फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की आशा व्यक्त की। यह संदेश दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास, रक्षा सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी नवाचार में साझेदारी की निरंतर प्रगति को दर्शाता है।

🇷🇺 भारत–रूस संबंध: पुतिन की सराहना

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई संदेश भेजते हुए भारत की सामाजिक-आर्थिक, वैज्ञानिक, और तकनीकी प्रगति की खुलकर प्रशंसा की।
पुतिन के अनुसार, भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक सम्मानित और प्रभावशाली स्थान बनाया है। दशकों से रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भारत–रूस के मजबूत और स्थायी संबंध इसका प्रमाण हैं।

🌏 भारत की वैश्विक पहचान का विस्तार

फ्रांस और रूस जैसे महाशक्तियों के ये संदेश स्पष्ट संकेत देते हैं कि भारत अब केवल एक उभरती शक्ति नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद और निर्णायक वैश्विक भागीदार बन चुका है। स्वतंत्रता की शताब्दी वर्ष 2047 को लक्ष्य मानकर भारत निरंतर आर्थिक विकास, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए मानक स्थापित कर रहा है।

✍️ समापन विचार

भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर फ्रांस और रूस की शुभकामनाएँ केवल औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और सुदृढ़ वैश्विक साझेदारियों की गवाही हैं। यह अवसर हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि साझा भविष्य की ओर बढ़ने का एक प्रेरणादायी संकल्प है।


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