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🚀 आत्मनिर्भर भारत की राह में युवा शक्ति का योगदान


भारत विश्व का सबसे युवा देश माना जाता है। यहाँ की आधी से अधिक जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यह युवा वर्ग केवल जनसंख्या का आँकड़ा नहीं है, बल्कि राष्ट्र की प्रगति की सबसे बड़ी पूँजी है। यदि इन्हें सही दिशा और अवसर मिलें, तो यही शक्ति भारत को आत्मनिर्भर और विश्वगुरु बनाने की क्षमता रखती है।

🔹 आत्मनिर्भरता की नींव – कौशल और नवाचार

आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी पूरा होगा जब युवा केवल नौकरी पाने की सोच से आगे बढ़कर, स्वयं रोजगार और नवाचार की दिशा में कदम बढ़ाएँ। आज कृषि, विज्ञान, स्वास्थ्य, डिजिटल प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप के क्षेत्र में युवा अपने अभिनव विचारों से परिवर्तन ला रहे हैं। सरकार की “मेक इन इंडिया” और “स्टार्टअप इंडिया” जैसी योजनाएँ इस सोच को और मजबूती दे रही हैं।

🔹 समाज सुधार में युवाओं की भूमिका

युवा केवल आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव के भी महत्वपूर्ण वाहक हैं। स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा के प्रसार और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी आत्मनिर्भर भारत की सामाजिक नींव को मजबूत कर रही है।

🔹 तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

डिजिटल क्रांति के दौर में भारतीय युवा आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। यह न केवल देश की तकनीकी क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाता है।

🔹 युवा और राष्ट्र निर्माण

किसी भी राष्ट्र की प्रगति केवल नीतियों से नहीं होती, बल्कि उसे कार्यान्वित करने वाली शक्ति से होती है। भारत का युवा वर्ग ऊर्जा, जोश और संकल्प का प्रतीक है। यदि यही युवा शिक्षा, कौशल और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़े, तो भारत को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनने से कोई नहीं रोक सकता।

✅ निष्कर्ष

युवा शक्ति ही आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ है। उनका उत्साह, नवीन सोच और संघर्षशीलता आने वाले वर्षों में भारत को न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक दृष्टि से भी सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित करेगी। जब युवा आगे बढ़ेंगे, तभी भारत आत्मनिर्भरता की उस ऊँचाई तक पहुँचेगा, जिसका सपना हर भारतीय देखता है।


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