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विश्व युद्ध प्रथम : आधुनिक इतिहास का निर्णायक अध्याय


प्रस्तावना

20वीं शताब्दी की शुरुआत मानव सभ्यता के लिए परिवर्तनकारी दौर था। इसी काल में 1914 से 1918 तक लड़ा गया विश्व युद्ध प्रथम आधुनिक इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में से एक रहा। इस युद्ध ने न केवल राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा बदली, बल्कि विज्ञान, तकनीक, समाज और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव छोड़ा।

युद्ध का कारण

विश्व युद्ध प्रथम के पीछे कई कारण थे, लेकिन प्रमुख कारण यूरोपीय शक्तियों के बीच औपनिवेशिक प्रतिस्पर्धा, सैन्य गठबंधन, राष्ट्रवाद की तीव्रता और सर्बिया के युवराज आर्चड्युक फ्रांज फर्डिनेंड की हत्या को माना जाता है। इस हत्या ने पहले से भड़क रहे तनाव में आग का काम किया और धीरे-धीरे लगभग पूरी दुनिया इस युद्ध में खिंच गई।

प्रमुख पक्ष

इस युद्ध में दो बड़े गुट बने—

  1. मित्र राष्ट्र (Allied Powers): ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, इटली, अमेरिका और जापान
  2. मध्य राष्ट्र (Central Powers): जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, ओटोमन साम्राज्य और बुल्गारिया

युद्ध की विशेषताएँ

परिणाम

  1. भारी जनहानि: लगभग 2 करोड़ लोग मारे गए और करोड़ों घायल हुए।
  2. साम्राज्यों का अंत: ऑस्ट्रिया-हंगरी, ओटोमन और जर्मन साम्राज्य का विघटन हुआ।
  3. नई व्यवस्थाएँ: वर्साय संधि (1919) के बाद जर्मनी को कठोर दंड दिया गया, जिससे आने वाले समय में हिटलर का उदय और द्वितीय विश्व युद्ध की नींव पड़ी।
  4. राष्ट्र संघ (League of Nations): अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने के लिए इस संगठन की स्थापना हुई।

भारत पर प्रभाव

भारत, जो उस समय ब्रिटिश उपनिवेश था, इस युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुआ। लगभग 13 लाख भारतीय सैनिक युद्ध में भेजे गए। इससे भारत की जनता में राजनीतिक चेतना और स्वतंत्रता की मांग और मजबूत हुई।

निष्कर्ष

विश्व युद्ध प्रथम केवल देशों के बीच संघर्ष नहीं था, बल्कि यह मानव सभ्यता के लिए एक ऐसा मोड़ था जिसने हमें शांति और सहयोग की आवश्यकता का गहरा संदेश दिया। इस युद्ध ने दिखाया कि लोभ, साम्राज्यवाद और सत्ता की लालसा कैसे पूरी दुनिया को विनाश की ओर धकेल सकती है।


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