
प्रस्तावना
भारत में मकर संक्रांति, स्वतंत्रता दिवस और अन्य पर्वों पर पतंगबाज़ी की परंपरा वर्षों पुरानी है। परंतु हाल के वर्षों में पतंग उड़ाने का यह मनोरंजक शौक लोगों की जान के लिए खतरा बन गया है। खासतौर पर चीनी मांझा (नायलॉन से बना सिंथेटिक धागा) ने कई जिंदगियाँ लील ली हैं। ताज़ा घटना में दिल्ली के एक 30 वर्षीय युवक की गर्दन चीनी मांझे से कट गई, जिससे उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
घटना का विवरण
दिल्ली पुलिस के अनुसार यह हादसा तुगलकाबाद मेट्रो स्टेशन के पास हुआ, जब राजनीश नामक युवक बाइक से गुजर रहा था। अचानक लाल रंग के सिंथेटिक मांझे ने उसकी गर्दन को बुरी तरह से काट दिया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और घायल को गंभीर अवस्था में AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति बेहद चिंताजनक है।
चीनी मांझा क्यों है खतरनाक?
चीनी मांझा साधारण सूती धागे से अलग होता है। यह प्लास्टिक और नायलॉन आधारित धागा होता है, जिसे अक्सर कांच के चूरे या धातु के पाउडर से कोट किया जाता है। इसके कारण यह अत्यधिक धारदार हो जाता है।
- यह राहगीरों और बाइक चालकों के लिए घातक सिद्ध होता है।
- बिजली की तारों से टकराने पर शॉर्ट सर्किट और आग लगने की घटनाएँ होती हैं।
- पक्षियों के लिए भी यह मांझा मौत का फंदा बन जाता है।
कानूनी स्थिति
दिल्ली सहित कई राज्यों में चीनी मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है। बावजूद इसके, काली बाजार में इसकी सप्लाई अब भी जारी है। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने 325 रोल चीनी मांझे के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना है कि इसके खिलाफ विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, मगर हादसे अब भी थमने का नाम नहीं ले रहे।
बढ़ती चिंताएँ
बार-बार लगाई जा रही रोक और पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद चीनी मांझे का बाज़ार सक्रिय है। यह स्थिति न केवल प्रशासन के लिए चुनौती है बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी है।
निष्कर्ष
यह घटना हमें एक बार फिर चेतावनी देती है कि मनोरंजन और परंपरा कभी भी जीवन से बड़ी नहीं हो सकती। चीनी मांझा जैसे खतरनाक उत्पादों पर सख्ती से रोक लगाना और आम लोगों को जागरूक करना समय की आवश्यकता है। सरकार और समाज दोनों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी की जिंदगी सिर्फ एक मांझे की डोर से न कटे।